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नवरात्र कल से शुरू तीन स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देती है माँ, कोरोना के चलते इस बार दर्शन सभंव नहीं



रसड़ा (बलिया)  बलिया लखनऊ राजधानी मार्ग पर रसड़ा तहसील क्षेत्र के पहाड़पुर गांव के दक्षिण पूर्व अवस्थित उचेड़ा गांव में माँ  चण्डी भवानी के मंदिर पर प्रथम दिन हजारों  श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता था मगर कोरोना वायरस के चलते यूपी में कल से तीन दिनों तक लाँक डाउन किया गया इसी को मद्देनजर इस वर्ष माँ का दर्शन पर रोक प्रशासन ने लगा दिया है।
मंन्दिर प्रशासन ने अखण्ड भारत न्यूज संवाददाता को दूरभाष से बतलाया कि इस बार ना मेला लगेगा ना दर्शन के लिए दरबार सजेगा हालांकि मन्दिर पुजारी ने बतलाया कि माँ का पूजा पाठ प्रतिदिन होगा मगर आम जनता के लिए दरबार बंद रहेगा।
मंहत अजय गीरी  ने बतलाया कि   नवरात्र में यहां माता रानी को खप्पर, प्रसाद, नारियल, चुनरी आदि चढ़ाकर पूजा आराधना करने से मां भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।
विंध्याचल की माँ  विंध्यवासिनी की प्रतिमूर्ति के रूप में विख्यात इस मंदिर में मां के सिरमुखी स्वरूप का यहां भक्तों को दर्शन होता है। जो चौबीस घण्टे में तीन रूप धारण मां करती है। सुबह में बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था व रात्रि में वृद्धावस्था के रूप में दर्शन देने वाली माँ चण्डी चैत्र नवरात्र के अलावा भी सच्चे मन से दरबार में आने वाले भक्तों की मनोवांछित मनोकामनाएं पूर्ण करती है। मां चण्डी के स्वमेव उचेड़ा गांव में अवतरित होने की कथा भी काफी कौतूहल पूर्ण है।
कालान्तर में लगभग 180 वर्ष पूर्व मंदिर के समीपस्थ गोपालपुर गांव के एक ब्राम्हण प्रतिदिन मिर्जापुर विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने के लिये उस समय पैदल ही जाया करते थे। समय बीतता गया और वृद्धावस्था में जब वे चलने फिरने में असमर्थ हो गये थे तो उन्होंने मां के दरबार में   माँ से गुहार लगाते हुए कहा माँ अब मै आपके पास नहीं आ पाऊंगा। इसलिये अब आपको मेरे साथ ही चलना होगा। यह सुन मां विंध्यवासिनी ने भक्त को अपेक्षित आश्वासन दिया। वहां से लौटने के बाद उक्त ब्राम्हण रोज की तरह अपने घर में सो रहे थे, कि एक दिन स्वप्न में माँ ने मंदिर के स्थान पर स्वमेव अवतरित होने की बात बतायी  स्वप्नन  देखते ही ब्राम्हण की नींद टुट गयी और सुबह होते ही वे गांव के पूरब और दक्षिण स्थित उचेड़ा गांव जो उन दिनों काफी जंगल के रूप में था वहां जा पहुंचे। वहां जाने के बाद जब उन्होंने जमीन की खुदाई करायी तो वहां मां विंध्यवासिनी का सिरमुखी प्रतिमा दिखायी दी।
उन्होंने प्रतिमा के पूर्ण स्वरूप को बाहर निकालने के लिये काफी दिनों तक खुदाई करायी किन्तु प्रतिदिन मां की प्रतिमा जमीन के अंदर धंसती ही जा रही थी। बाद में माँ ने उन्हें पुनः स्वप्न दिखाकर बताया कि मेरा स्वरूप यही रहेगा और मै इसी रूप में यहीं से लोककल्याण करती रहूंगी। तत्पश्चात ब्राम्हण ने यहां मंदिर का निर्माण कराया और तभी से निर्माण व सुन्दरीकरण होते-होते आज यहां मां चण्डी का भव्य व विशाल मंदिर स्थापित हो चुका है। जहां चैत्र नवरात्र व शारदीय नवरात्र में मेला व विविध कार्यक्रमों का भव्य  आयोजन होता है। जिसमे लाखों श्रद्धालुजन सहभागिता करते है। आज भी निःसंतान, असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों की पीड़ा मां चण्डी के दर्शन करते ही दूर हो जाते है। मां के मंदिर पर इलाके के तमाम गांवों के लोग शादी, मुण्डन, जनेव संस्कार आदि शुभ कार्य होने पर इनकी विशेष पूजा करते है।  
इसी क्रम में मां कपिलेश्वरी भवानी, मां मंगला भवानी, मां शांकरी देवी, मां पंचरुखा देवी,ब्रहमाणी आदि मंदिरों में इस बार दर्शन सभंव नहीं  लाँक डाउन के चलते प्रशासन ने लोगों को घरों के अन्दर ही पूजा पाठ करने का अपील किया है ।                                



रिपोर्ट : पिन्टू सिंह

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