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देवकली सूर्य मंदिर पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़ लगता है मेला



बेल्थरारोड, बलिया। जिनकी आराधना मात्र से ही दुख दरिद्रता का नाश हो जाता है। दर पर मत्था टेकते ही सकल मनोकामना पूर्ण हो जाती है। उस भगवान भास्कर एवं जगत जननी माता जगदम्बा की अभ्युदय स्थली देव नगरी देवकली में डाला छठ के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन जनपद ही नहीं गैर जनपदों के भी लोग यहां आते है और सूर्य कुंड में स्नान कर भगवान भास्कर को अर्घ्य देते है। मान्यता है कि यहां स्थित भगवान भास्कर एवं माता जगदम्बा के पूजा अर्चना करने से चर्मरोग आदि से छुटकारा मिलता है।

       


     

देवकली गांव के बुजुर्गो के अनुसार नगरा ब्लाक मुख्यालय से 15 किमी उत्तर पूरब मालीपुर सिकंदरपुर मार्ग पर संकलद्विपीय ब्राम्हणों की नगरी देवकली में प्राचीन काल में गांव के उत्तर तरफ स्थित घनघोर विशाल जंगल में चर्मरोग पीड़ित कोई राजा शिकार करते हुए पहुंच गया। राजा को प्यास लगी तो उसने सहचरो से जल लाने को कहा। सहचर जल ढूंढने के लिए जंगल में विचरण करने लगे। एक जगह कुंड में थोड़ा सा कीचड़युक्त जल दिखाई दिया। उसी जल को सहचर कपड़े से छानकर राजा के पास लेकर पहुंचे। कहा जाता है कि राजा ने पीने के लिए ज्योही जल को स्पर्श किया त्योही राजा का चर्मरोग युक्त काया कंचन की तरह साफ सुथरा हो गया। राजा प्रसन्न होकर अपने राज्य को लौट गया और कुंड की खुदाई का आदेश दिया। कुंड की खुदाई करने पर उसमे छोटी बड़ी तीन भगवान भास्कर की  बहुमूल्य काले पत्थरों से निर्मित  प्रतिमाएं मिली। दो मूर्तियां तो चोरी हो गई । एक प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए ग्रामीणों ने मन्दिर का निर्माण आरम्भ किया लेकिन जब जब मन्दिर निर्माण आरम्भ होता था,मन्दिर की दीवारें स्वतः गिर जाती थी। मन्दिर का निर्माण न होने की स्थिति में ग्रामीणों ने उस प्रतिमा को दीवार के सहारे खड़ा कर पूजन अर्चन शुरू कर दिया। 



कालांतर में भगवान भास्कर की मूर्ति से कुछ दूरी पर उत्तिल नाम का एक दलित युवक अपने पालतू पशुओं को चरा रहा था और धूप से बचने के लिये एक वृक्ष के छाये में बैठ कर अनायास ही अपनी लाठी को जमीन  पर पटकने लगा। लगातार लाठी पटकने से उक्त स्थान की मिट्टी हटी और वहाँ पत्थर की आकृति होने का अहसास हुआ ।उत्तिल  यह बात गांव वालों को बताया।उत्तिल के कहने पर गांव वाले सुबह उस स्थान की खुदाई किये तो वहाँ पर चार फीट ऊँची बहुमूल्य काले पत्थरों से निर्मित  जगत जननी जगदम्बा माता की प्रतिमा मिली । यह प्रतिमा अपने आप मे अनोखी है जो जनेऊधारी है। वर्ष 2002 में तत्कालीन वनमंत्री राजधारी ने  वहाँ एक भव्य  मंदिर का  निर्माण कराया तथा भगवान भास्कर व जगत जननी  माता  की प्रतिमा को  स्थापित कराये। डाला छठ के मौके पर काफी दूर दूर से श्रद्धालु देवकली स्थित सूर्य मन्दिर पर छठ मनाने आते है तथा यहां स्थित पोखरे में स्नान कर भगवान भास्कर का पूजन अर्चन करते है। दुर्भाग्य है कि धार्मिक महत्व के पौराणिक कालीन पोखरा के सुंदरीकरण के तरफ किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं गया। देवकली सहित आसपास के गावों के लोगो का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन इस तरफ नजरे इनायत करे तो यह जगह भी पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।

                            


रिपोर्ट संतोष द्विवेदी

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