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अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस बधाई देने से काम नहीं चलेगा मजदूरों का हक देना होगा


रसड़ा (बलिया) आज अंतरराष्ट्रीय दिवस है । मजदूर देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता ,और उसका देश के विकास में अहम योगदान होता है ,किसी भी समाज, देश , और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहम भूमिका होती  ,मजदूरों के बिना किसी भी औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना नहीं की जा सकती, श्रमिकों का समाज में  एक स्थान है, लेकिन आज भी देश में मजदूरों के साथ अन्याय और शोषण होता है ।आज भारत देश में बेशक मजदूरों को  8 घंटे काम करने का संबंधित कानून लागू कागजों पर हो गया है लेकिन इसका पालन सिर्फ सरकारी कार्यालय ही करते हैं ,बल्कि देश में अधिकतर प्राइवेट कंपनियो मोल या फैक्टरीयां अब भीअपने यहां काम करने वाले को 12 घंटे तक काम कराते हैं ,जो कि एक प्रकार से मजदूरों का शोषण है ,आज जरूरत है कि सरकार को इस दिशा में एक प्रभावी कानून बनाना चाहिए ,और सख्ती से पालन कराना चाहिए ।भारत में मजदूरों की मजदूरी के बारे में बात की जाए तो एक बहुत बड़ी समस्या है ,आज भी देश में कम मजदूरी पर मजदूरों से काम कराया जाता है, जो एक प्रकार का शोषण है, आज भी मजदूरों से प्राइवेट कंपनियों द्वारा पूरा काम लिया जाता है ,लेकिन उन्हें मजदूरी के नाम पर मामूली मजदूरी पकड़ा दी जाती है ,जिससे मजदूरों को दो वक्त परिवार का खर्चा चलाना मुश्किल हो जाता है ,पैसों के अभाव में मजदूरों  के बच्चों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है ,मजदूरों को मजदूरी दिया जाने पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है ,और ना ही कोई कार्यवाही की जाती है ,आज भी हमारे देश भारत में लाखों लोगों से बंधुवा मजदूरी कराई जाती है, जब किसी व्यक्ति को बिना मजदूरीके मजदूरी करने के लिए किया जाता है या मजदूरी कराई जाती है तो वह बंधुवा मजदूरी कहलाती है ,अगर देश में कहीं भी बंधुवा मजदूरी कराई जाती हो तो सीधे-सीधे बंधूवा मजदूरी प्रणाली अधिनियम का उल्लंघन  होगा, जो वास्तविक शोषण को रोकने के लिए बनाया गया था, लेकिन आज भी जनसंख्या के कमजोर वर्गों के आर्थिक शोषण को नहीं रोका जा सका है ,आज सभी लोग एकजुट होकर अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की बधाई दे रहे हैं ,लेकिन सिर्फ बधाई देने से काम नहीं चलेगा  मजदूरों का हक देना होगा ।


पिन्टू सिह

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