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बलिया से 12 किसानों का दल तीन दिवसीय कैट भ्रमण के लिए कल होगा रवाना

बलिया : माँ सुरसरी सेवा संस्थान, कथरिया द्वारा नाबार्ड के सहयोग से बलिया जिले से 12 किसानों का दल कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर में तीन दिवसीय कैट भ्रमण के लिए कल रवाना होगे जिसको बलिया जिले से कृषि उप निदेशक बलिया, एल डी एम बलिया अशोक कुमार पांडेय,नाबार्ड के डी डी एम अखिलेश कुमार झा द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा,माँ सुरसरी सेवा संस्थान के सचिव सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जनपद की 75 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है,बलिया जनपद के लिए यह सौभाग्य कि बात है कि कृषि की उन्नति एवं विकास के लिए नाबार्ड संस्थाओं के माध्यम से एफटीटीएफ/एफएसपीएफ का संचालन करवा रही है, जिससे किसान आधुनिक खेती से जुड़ रहे है तथा परियोजना से जुडे़ किसानों की बराबर माॅग रहती है कि उन्नतिशील खेती हेतु हम लोगों को कृषि विश्वविद्यालयों, सब्जी अनुसंधान केन्द्रों, कृषि विज्ञान केन्द्र आदि जगहों पर भ्रमण कराया जाय ताकि हम कृषि सम्बन्धित नई तकनीकी अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर आत्मनिर्भर बन कर भारत सरकार के सपनों को साकार कर सके,माँ सुरसरी सेवा संस्थान नाबार्ड द्वारा स्वीकृत एफ.एस.पी.एफ. परियोजना के अंतर्गत मेडिसिनल प्लांटस पिपरमिनट एवं हल्दी की खेती का सफलतापूर्वक संचालन करने के साथ साथ एवं परियोजना के अन्तर्गत किसानों की सुविधा के लिए पिपरमिंट के आश्वन प्लांट भी लगवाया गया हैं, जिससे किसानों को अधिकाधिक लाभ मिल सके,परियोजना के दौरान फील्ड भ्रमण एवं वैज्ञानिक व्याख्यानों द्वारा परियोजना से जुड़े किसानों का उचित मार्गदर्शन किया गया जिससें किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरुक करनें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परियोजना से लाभान्वित किसानों में से चयनित 10 प्रगतिशील किसानों एवं 02 अन्य प्रगतिशिल किसानों को संस्था नाबार्ड के सहयोग से लालगंज,बक्सर में स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में परिचयात्मक भ्रमण पर ले जा रही है,जिसके अन्तर्गत किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर के फार्म हाउस पर सघन बागवानी, राइस कम फीस माॅडल, शीड प्रोसेसिंग यूनिट, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, पाॅली हाउस आदि की जानकारी दी जायेगी, इसी के साथ भ्रमण के दौरान अटाव (डुमराव) और लांलगंज में हर्बल गार्डेन, लेमन ग्रास, हल्दी, पिपरमिंट आदि की खेती एवं सिंचाई की ड्रिप एरिगेशन, स्प्रिंकलर आदि नई पद्धिति के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी जायेगी, साथ ही भ्रमण से लौटने के उपरान्त इन किसानों के माध्यम से क्षेत्र के अन्य किसानों को भी अपनी जानकारी को बताने का कार्य करेंगें, जिससे भविष्य में इन किसानों के साथ मेडिसिनल प्लांटस पर एफ.पी.ओ. के गठन में भी सहायक होगी, जिससे किसानों के आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिलेगी।



रिपोर्ट धीरज सिंह

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