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नवसृजित रतसर कलां निकाय चुनाव को लेकर मतदाताओं में उत्साह,बन रहे नए राजनीतिक समीकरण,सियासी हलचल हुई तेज




रतसर (बलिया) बहुप्रतीक्षित नगर निकाय रतसर कलां अब ग्रामीण वोटरों के रूप में नहीं,बल्कि नगर मतदाता के रूप में आने वाले चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्सुक है। आबादी के लिहाज से मतदाता न केवल जागरुक है,बल्कि सियासी उठा-पटक को भी समझने में पारंगत है। विगत कई वर्षों से यह क्षेत्र कांग्रेस,सपा एवं भाजपा का प्रतिनिधि रहा है और कालांतर में मतदाताओं को सियासी दलों के नेताओं की कथनी और करनी का फर्क भी अनुभव बना चुका है। अब सियासी फिजा में परिवर्तन हो चुका है। रतसर कलां के नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में अभी से सरगर्मियां तेज हो गई हैं। यह पहला चुनाव होगा जब रतसर कलां निकाय के मतदाता अपने नवीन अध्यक्ष का चुनाव करेगें। इस संदर्भ में जब रतसर कलां क्षेत्र में शामिल ग्राम सभा के नागरिकों से संपर्क कर उनका राजनीतिक मिजाज जानने की कोशिश की गई तो मतदाताओं ने बेबाकी से अपने विचार रखे तथा नवीन अध्यक्ष के रूप में शिक्षित,समाजसेवी तथा स्वच्छ छवि के व्यक्ति को चुनाव में अध्यक्ष चुनने की बात रखी। बतातें चले कि रतसर कलां नगर पंचायत बनी है तब से राजनीतिक गलियारे में हलचल सी उमड़ रही है। नगर वासियों के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान है। इसके पहले प्रधानी के विषय में चर्चा हो रही थी लेकिन अब जहां देखें सिर्फ चेयरमैन की बातें हो रही है। नगर पोस्टर बैनर से सजा हुआ है। मैदान में सभी प्रत्याशी आगामी चुनाव को देखते हुए अपनी- अपनी बिगुल फूंक रहे है। जनता से संपर्क बना रहे है। भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो नव सृजित नगर पंचायत में शासन द्वारा रतसर खुर्द, छतवां, जिगनहरा,सुहवां,सरभारी खुर्द,टड़वा और कीरत पट्टी गांव को मिलाते हुए नगर पंचायत का गठन किया गया है। लगभग 25 हजार आबादी में 18 हजार मतदाता नवीन अध्यक्ष का चुनाव करेगें। वर्तमान में राजनीतिक दलों एवं राजनीतिक शख्सियतों ने चुनावी अभियान का बिगुल अभी से बजा दिया है। सोशल मीडिया पर लोग सक्रिय है और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा दर्शाने के लिए विभिन्न इलेक्ट्रानिक संसाधनों का खुल कर उपयोग कर रहे हैं। नगर निकाय क्षेत्र में होर्डिंग्स एवं प्रचार सामग्री अभी से प्रचुर मात्रा में दिखाई दे रही हैं। देखना दिलचस्प होगा कि नगर निकाय के पहले अध्यक्ष का ताज किसके सिर पर सजता है ?


रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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