एक फरवरी को भी नहीं हो सकेगी निर्भया के दोषियों को फांसी, जाने क्यों
नई दिल्ली। फांसी के फंदे से बचाने के लिए निर्भया के दोषी हर कदम उठा रहे हैं जो अदालती फैसले को मूर्त रूप देने में बाधक बन रहा है। तभी तो निर्भया केस का दोषी पवन गुप्ता खुद को नाबालिग बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन दायर की है। पवन गुप्ता का दावा है कि जब घटना घटी थी तब वह नाबालिग था। पवन का आरोप है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इस तथ्य को ध्यान से नहीं सुना है। इससे पहले निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी मुकेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट ने दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी कर दिया है और 17 जनवरी को ही राष्ट्रपति ने निर्भया के दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी है। बावजूद इसके कोर्ट द्वारा जारी नए डेथ वारंट के मुताबिक 1 फरवरी को आरोपियों की फांसी असंभव लग रही है।
नया डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया केस के दोषी पवन ने अब खुद को अपराध के वक्त नाबालिग होने का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) दाखिल की है। दोषी पवन कुमार गुप्ता ने हाई कोर्ट के 19 दिसंबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अदालत ने फर्जी दस्तावेज जमा करने और अदालत में हाजिर नहीं होने के लिए उनके वकील की निंदा भी की थी।
विधि विशेषज्ञों की मानें तो अभी दो दोषियों की क्यूरेटिव पिटीशन दायर होना बाकी है। इसके बाद तीन दोषियों की दया याचिका भी दायर होगी। जेल नियमावली के मुताबिक किसी अपराध के दोषियों को जब सामूहिक तौर पर डेथ वारंट जारी होता है तो उन्हें फांसी भी एक साथ देनी पड़ती है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोषियों को एक फरवरी को भी फांसी नही हो सकेगी।
डेस्क



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