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चंद्रशेखर का हुआ अपमान तो ईट का जवाब पत्थर से देंगे बलिया के युवा


बलिया। जिस चंद्रशेखर को आदर्श मानकर तमाम युवाओं ने राजनीति में कदम रखा था, उनका अपमान कतई  बर्दास्त नहीं किया जायेगा। हमारे जैसे हजारों लोग, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सरपरस्ती में रहकर राजनीति में कुछ हासिल किया, आज उनकी यादों को इस तरीके से सड़कों पर बिखरा देख कलेजा फट रहा है। जेहन में वही बगावती तेवर फड़फड़ा रहे हैं जिसके लिए बलिया की पहचान है। 

उक्त बाते टी०डी०कालेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं समाजवादी पार्टी के नेता सुशील पाण्डेय"कान्हजी"प्रेस को जारी अपने एक बयान में कहा। उन्होंने कि केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के एक आदेश से समाजवाद के पुरोधा की स्मृतियों को फेंकवा दिया गया और उसे नेस्तोनाबूत करने के लिए अपमान जनक तरीके से तोड़ा गया यह माफी के लायक नहीं है। बलिया के युवा केंद्र सरकार की ईंट का जवाब पत्थर से देंगे। 

 यह मान भी लिया जाय कि भू-माफियाओं के साथ मिलकर एक कागजी नोटिस जारी कर इसे तोड़ा गया, लेकिन इस कानूनी दाव-पेंच के सहारे हमारी भावनाओं को क्षत-विक्षत किया गया है। यह समूचे जनपद का मानहानि का गुनाह बनता है। 

यह गुनाह करने वाली सत्ता को याद रखना चाहिए कि हमारा इतिहास बगावती तेवरों का रहा है। हम यूं ही सबसे पहले आजाद हुए थे। अपने पर आ जाएं तो चूलें हिला देते हैं। इस दम्भी सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

युवाओं से अपील है कि अगर हम अपने पुरखों महर्षि भृगु, अमर शहीद मंगल पाण्डेय, चित्तू पाण्डेय और चंद्रशेखर जैसे लोगों की गौरवशाली परम्परा को नहीं संरक्षित कर सके तो हमारा गौरवशाली इतिहास हमें माफ नहीं करेगा।
                            


By-Ajit Ojha

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