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घाघरा की कटान रोकने के लिए बाल श्रमिकों कराया जा रहा कार्य



 मनियर, बलिया। घाघरा के बढ़ते जलस्तर से  नवकागांव व रिगवन छावनी गावं के पास  हो रहे कटान से तटवर्ती ग्रामीण दहशत में है। वहीं कटान को रोकने के लिए विभाग द्वारा अपनी पुरानी निति को अपनाते बांस के चोंगे में ईंट के टुकड़े को बाल मजदूरों से बोरी में भरवाकर लूट खसोट का कार्य कराया जा रहा है। जबकि बाल मजदूरी कराना कानूनी अपराध है।

गौरतलब हो कि लगातार हो रही  बरसात के कारण घाघरा नदी का जलस्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती गांव के तरफ घाघरा का  रूख बढ़ता जा रहा है। तटवर्ती गांव रीगवन छावनी  व नवका गांव   को बचाने के लिए पहले से बने प्रधानमंत्री सड़क से महज 100 मीटर की दूरी पर उपजाऊ जमीन को घघरा निगलते निगलते नदी  नवकागांव व रिगवन छावनी की तरफ  अपना रूख अख्तियार करती जा रही है। गांव को बचाने के लिए लायलान की बोरी का प्रयोग न कर  30 जून से 7 सौ मीटर की दूरी को  तीन कन्टेक्टरों में बांटकर कटान रोधी कार्य पुरानी निति से बाँस के चोंगे बनाकर उसमें प्लास्टिक की बोरियों में ईंट के टुकड़े भरकर बाढ़ विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी मे काम  कराया जा रहा है। 

सबसे चौकाने वाला तथ्य यह है कि एक तरफ सरकार की मंशा है कि बाहर से आये  प्रवासी मजदूरों को अधिक से अधिक  कार्य दिया जाय। लेकिन मौके पर खेलने खाने वाले 10 वर्ष से कम उम्र के बाल मजदूरों से 2 रूपए प्रति बोरी भरने का लालच देकर कार्य लिया जा रहा है। बाल मजदूरों ने बताया कि दिन भर 100 बोरी ईंट के टुकड़े हम करीब 12 बच्चें भर लेते है। वहीं अन्य मजदूरों ने बताया कि एक चोगें को बोल्डर सहित तैयार कर डालने के बाद प्रति चोंगा एक हजार रूपए मिलता है।

बाल मजदूरी कराने के संबन्ध में मौके पर उपस्थित बाढ़ विभाग के एसडीओ इन्द्रासन कुमार गौतम ने बताया कि बच्चें अपनी स्वेच्छा से कार्य कर रहे है।इसमें कोई जोर जबरजस्ती नहीं है ।


रिपोर्ट राम मिलन  तिवारी

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