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ईओ मणि मंजरी राय आत्महत्या केसः अब हाई कोर्ट में आठ अक्टूबर को ‌होगी सुनवाई



मनियर, बलिया। ईओ मणि मंजरी राय केस मामले में हाई कोर्ट ने 28 सितंबर को सुनवाई करते हुए मनियर चेयरमैन भीम गुप्ता, कंप्यूटर आपरेटर अखिलेश कुमार व सिकंदरपुर के ईओ संजय राव की अग्र‌िम जमानत के लिए सुनवाई आठ अक्टूबर निर्धारित किया है। जबकि टैक्स लिपिक विनोद सिंह को हाई कोर्ट ने तीन सितंबर की सुनवाई में ही गिरफ्तारी पर रोक लगाने का स्टे ‌दे दिया है। वहीं आरोपी चालक चन्दन कुमार को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब देखना यह है कि कोर्ट चेयरमैन भीम गुप्ता व कंप्यूटर आपरेटर अखिलेश को टैक्स लिपिक विनोद सिंह की भांति गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश देती है या फिर खारजि करती है।

ज्ञात हो कि विगत छह जुलाई 2020 को नगर पंचायत मनियर की ईओ रही मणि मंजरी राय ने बलिया कोतवाली स्थित आवास विकास कॉलोनी स्थित अपने आवास में सुसाइड लिख पंखे के हुक से फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया था। इस मामले में मृतका के भाई विजयानन्द राय की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मनियर चेयरमैन भीम गुप्ता, ईओ सिकंदरपुर संजय राव, टैक्स लिपिक विनोद सिंह, कम्प्यूटर आपरेटर अखिलेश व चालक चन्दन कुमार को आरोपी बनाया था। जिसमें ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।


वहीं टैक्स लिपिक विनोद सिंह ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल किया था। जिसमें तीन सितंबर को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए स्टे दे दिया। उधर, चेयरमैन भीम गुप्ता व कंप्यूटर आपरेटर अखिलेश के मामले में आठ सितंबर को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई 11 सितंबर तय किया। इसके बाद 21 सितंबर को सुनवाई करते हुए अब हाई कोर्ट ने 28 सितंबर को सुनवाई का तारीख निर्धारित किया हैं। इस मामले में कोर्ट ने 28 सितंबर को सुनवाई करते हुए आठ अक्टूबर को अ‌ग्रिम सुनवाई की तारीख निश्चित किया है।

उधर, कोतवाली थाना की पुलिस व एसओजी टीम लगातार फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है। लेकिन अभी तक आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। वही ईओ के भाई विजयानंद जनपदीय पुलिस पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाते हुए लगातार सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। ईओ के भाई ने कहा कि 82 की कार्रवाई होने के 30 दिन के अंदर कुर्की की कार्रवाई होने का प्राविधान है। इसके अलावा हत्या व आत्महत्या आदि के मामले में विवेचना अधिकतम 90 दिन के अंदर कोर्ट में विवेचक द्वारा प्रस्तुत करने का प्राविधान है। लेकिन जनपदीय पुलिस इसमें लापरवाही बरतती जा रही है। जिसके कारण इनसे विश्वास समाप्त हो जा रहा है। अब देखना यह ह‌ै कि पुलिस की भूमिका क्या होती है?



रिपोर्ट राम मिलन तिवारी

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