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1857 की क्रांति का परिणाम है सन 1942 की अगस्त क्रांति : केके पाठक


दुबहर, बलिया । बलिया बलिदान दिवस के मौके पर मंगल पांडे विचार मंच के सदस्यों ने शहीद मंगल पांडे के पैतृक गांव नगवा पहुंचकर उनकी आदमकद मूर्ति के समक्ष पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शहीदों को नमन किया।

इस मौके पर मंगल पांडे विचार मंच के अध्यक्ष केके पाठक ने कहा कि 1857 की क्रांति का परिणाम है सन् 1942 की अगस्त क्रांति। मंगल पांडे की कुर्बानी से प्रेरित होकर क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए 1942 में व्यापक स्तर पर कुर्बानी दी।उन्होंने कहा कि बलिया के गौरवशाली क्रांतिकारी इतिहास को सहेजने के लिए वर्तमान की सरकारों के साथ जिले के पंचायत से लेकर लोकसभा तक के जनप्रतिनिधियों को प्रयास करना चाहिए ताकि बलिया के इस गौरवशाली क्रांतिकारी इतिहास की प्रेरणा संपूर्ण राष्ट्र के साथ ही आने वाली पीढ़ी को मिलती रहे। इसी क्रम में मंच के प्रवक्ता बब्बन विद्यार्थी ने कहा कि 1942 में 19 अगस्त को क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन को पंगु बना दिया था। परिणाम हुआ कि ब्रिटिश हुकूमत के कलेक्टर जे. निगम ने बागी बलिया के क्रांतिकारियों के समक्ष सरेंडर कर दिया। चित्तू पांडे ने कलेक्टर का कार्यभार संभाल कर कारागार का फाटक खोलने का आदेश दिया, जेल में कैद सभी आजादी के दीवाने मुक्त हो गए। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में प्रमुख रूप से मंच के सचिव अरुण कुमार साहू, रमाशंकर तिवारी, विवेक सिंह, डॉ० हरेंद्रनाथ यादव, गणेशजी सिंह, प्रधान विनोद पासवान, अरुणेश पाठक, प्रधान प्रतिनिधि भुवनेश्वर पासवान, रणजीत सिंह, रविंद्र पाल मुखिया, अनिल कुमार,नागेन्द्र तिवारी, गोविंद पाठक, डॉ सुरेशचंद्र प्रसाद, मनोज पाठक आदि रहे।


रिपोर्ट:-नितेश पाठक

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