नीम के पेड़ के नीचे मिली नवजात बच्ची, इंसानियत ने दिया ममता का सहारा। जन्म देने वाली मां ने छोड़ा, दो परिवारों में मासूम को अपनाने की भावनात्मक खींचतान
मनियर/बलिया। मनियर थाना क्षेत्र के बहदुरा गांव की सीवान में मंगलवार की सुबह नीम के पेड़ के नीचे एक लावारिस नवजात बच्ची मिलने से सनसनी फैल गई। जन्म के कुछ ही समय बाद मासूम को वहां छोड़ दिए जाने की बात सामने आने पर ग्रामीणों का कलेजा कांप उठा। हालांकि, इसी घटना के बीच इंसानियत और ममता की ऐसी तस्वीर भी सामने आई, जिसने लोगों को भावुक कर दिया।
बताया जाता है कि मंगलवार की सुबह गांव के कुछ लोग नित्य क्रिया के लिए सिवान की ओर गए थे। इसी दौरान उनकी नजर नीम के पेड़ के नीचे पड़ी नवजात बच्ची पर गई। मासूम को अकेला देखकर ग्रामीणों ने उसे तत्काल उठाया और गांव के चौराहे पर लेकर आए। इसके बाद बच्ची को चिकित्सक को दिखाया गया, जहां प्रारंभिक तौर पर उसके स्वस्थ होने की बात सामने आई।
बच्ची की हालत ठीक देखकर लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह इस घटना का सबसे भावुक पक्ष बन गया। मासूम को अपने पास रखकर बेटी की तरह पालने-पोसने के लिए दो परिवारों के बीच भावनात्मक खींचतान शुरू हो गई। एक परिवार मुस्लिम समुदाय की नट बिरादरी से था, जबकि दूसरा परिवार हिंदू समुदाय के अनुसूचित जाति वर्ग से बताया गया है।
आखिरकार बच्ची को हिंदू परिवार को इस भावना के साथ सौंप दिया गया कि वह उसे अपनी बेटी की तरह पाले और उसे कभी यह महसूस न होने दे कि उसे जन्म देने वाली मां ने उसे अकेला छोड़ दिया था।
इस दौरान बच्ची की देखभाल में भी इंसानियत की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। मनीष ठाकुर की मां, जो आशा बहू हैं, ने मासूम को नहलाया-धुलाया, उसकी मालिश की और उसे साफ कपड़े पहनाए। कुछ समय पहले तक जो बच्ची नीम के पेड़ के नीचे अकेली पड़ी थी, उसे अब किसी की गोद में ममता और अपनापन मिल रहा था।
घटना की जानकारी फैलने के बाद कई लोग फोन कर बच्ची को उन्हें सौंपने की इच्छा जताने लगे। लेकिन एक बार बच्ची को जिस परिवार को सौंप दिया गया, उसके बाद उसे वापस मांगना उचित नहीं समझा गया। अब सबसे बड़ी कामना यही है कि यह नन्ही जान हमेशा स्वस्थ रहे, सुरक्षित रहे और उसे ऐसा परिवार मिले जहां उसे भरपूर प्यार, सम्मान और अपनापन मिले।
जन्म देने और पालने के रिश्ते के बीच खड़ी यह घटना एक गहरी बात कह जाती है—रिश्ते केवल खून से नहीं बनते, कुछ रिश्ते इंसानियत और ममता से भी बनते हैं।
जिस परिस्थिति में बच्ची को वहां छोड़ा गया, उसके पीछे की वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच का विषय है। लेकिन इस मासूम के भविष्य के लिए आज सबसे जरूरी है कि उसे सुरक्षा, संरक्षण और स्नेह मिले।
जिसने जन्म दिया, उसके फैसले पर सवाल उठ सकते हैं, लेकिन जिस परिवार ने इस नन्ही जान को अपनाकर उसे अपनी बेटी की तरह पालने का संकल्प लिया है, उसके लिए यही दुआ है कि वह बच्ची को ऐसा प्यार दे कि उसे अपने जीवन की शुरुआत का दर्द कभी महसूस न हो।
ईश्वर इस नन्ही बच्ची के जीवन को खुशियों से भरें, उसे स्वस्थ रखें और उसका भविष्य उज्ज्वल बनाएं। मां ने जन्म दिया या नहीं, यह उसके अतीत का हिस्सा है—लेकिन अब उसे प्यार, सम्मान और सुरक्षित भविष्य मिले, यही इंसानियत की सबसे बड़ी जीत होगी। पूरे घटनाक्रम में समाजसेवी बड़े लाल यादव की बहुत बड़ी भूमिका रही।
रिपोर्ट - मनु तिवारी


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