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यूपी में लोकतन्त्र समाप्त, सरकार मौलिक अधिकारों की दुश्मन : नेता प्रतिपक्ष




बलिया । नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने कहा है कि सत्याग्रह लोकतन्त्र की आत्मा है। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व है कि वह लोकतन्त्र की आत्मा यानी सत्याग्रह की आवाज को सुने और उसे स्वीकार करे। मेरी नज़र में सत्याग्रह की आवाज नहीं सुनना, सत्याग्रह को कुचलना हत्या से भी अधिक गम्भीर अपराध है।

शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि बहुमत का अर्थ यह नहीं है कि मनमाना कानून बनाइए और उसे लाठी, गोली और पुलिसिया उत्पीड़न के बल पर मानने के लिए लोगों को मजबूर करिए। उसके विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से सत्याग्रह कर रहे लोगों पर पुलिस से हमला करवाइए। उन्हें फर्जी मुकदमों में फँसवाइए। उनके ऊपर गोली चलवाइए। जो भी सरकार इस तरह का काम करती है, वह मेरी नज़र में अलोकतांत्रिक है, हत्या से अधिक गम्भीर अपराध की अपराधी है। ऐसी सरकार को एक मिनट के लिए भी कुर्सी पर रहने का हक नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने कहा है कि इसके पहले भी एक सरकार बहुमत पाकर पगला गई थी। उसने बहुमत के बल पर आपातकाल लागू किया। बहुत से लोगों ने उसका उस समय विरोध किया जिसमें मैं खुद भी शामिल था। जवाब में सरकार ने दमन का रास्ता अख्तियार कर लिया और जेपी, चन्द्रशेखर, मुलायम सिंह यादव जैसे लोगों को जेल में डाल दिया। विरोधियों का उत्पीड़न शुरू कर दिया। इससे डर कर बहुत से लोग चुप्पी साध लिए लेकिन जब चुनाव हुआ तो आपातकाल थोपने वालों का सूपड़ा साफ हो गया। श्री चौधरी ने कहा है कि सत्याग्रह को कुचलने के लिए गोली चलाने और पाशविक बल का इस्तेमाल करने वाली सरकार को भी इतिहास के इस पन्ने को ठीक से पढ़ना चाहिए।

सत्याग्रहियों पर लाठी चार्ज, गोली वर्षा और लगातार किए जा रहे उत्पीड़न की निंदा करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी सत्याग्रह और सत्याग्रहियों की रक्षा करना अपना दायित्व समझती है। इसी भावना के तहत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव उन परिवारों के साथ खड़े हुए जिनके चिरागों को सरकार ने बुझा दिया। उन्होंने कहा कि सपा के हर कार्यकर्ता को अपने नेता अखिलेश यादव के इस स्टैंड को समझना चाहिए और सत्याग्रह तथा सत्याग्रहियों की किसी भी कीमत पर रक्षा करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने कहा है कि भारत सरकार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश की सरकार भी मौलिक अधिकारों की दुश्मन हो गई है। उत्तर प्रदेश में लोकतन्त्र पूरी तरह समाप्त हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस रवैये से लोकतांत्रिक लोगों में उत्तर प्रदेश की साख गिरी है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार को इस सच को समझना चाहिए और अपने ऐसे कृत्यों के लिए सत्याग्रहियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने आजमगढ़ के बिलरियागंज में महिला सत्याग्रहियों की बर्बर पिटाई और मैदान में पानी डालने की घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि इसके पहले यूपी के कई शहरों में सत्याग्रही टारगेट कर पीटे गए, जान से भी मारे गए, लखनऊ में महिला सत्याग्रहियों के कम्बल छीन लिए गए, अलाव बुझा दिया गया। उन्होंने कहा कि महिला सत्याग्रहियों के साथ इस तरह के निर्मम व्यवहार की कल्पना भी इस सरकार से पहले नहीं की जा सकती थी। इसके विरोध में हर उस आदमी को खड़ा होना चाहिए जो आदमीयत में विश्वास रखता है, जो लोकतन्त्र में यकीन रखता है।

नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था समाप्त हो गई है। यहाँ विधायक भी मारे मारे फिर रहे हैं, धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्यमन्त्री योगी आदित्य नाथ दिल्ली में सस्ती बिजली देने का वायदा करते फिर रहे हैं। उनमें नैतिकता है तो यूपी में सस्ती बिजली दें। सस्ती नहीं तो कम से कम उस भाव में तो दें ही, जिसमें दिल्ली सरकार दे रही है।



रिपोर्ट : धीरज सिंह

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