हनुमत महायज्ञ में राम कथा को सुनने के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
गड़वार(बलिया) क्षेत्र के चाँदपुर गांव के हनुमान मंदिर पर हरिदास जी के सानिध्य में चल रहे हनुमत महायज्ञ में कथावाचिका मानस मंजरी कुमारी साधना ने कथा प्रसंग के दौरान रामकथा के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।कहा कि राम कथा का विकास लोक कल्याण की भावना से ही किया गया है।श्रीराम का जीवन एक ऐसा आदर्श जीवन है जिसके अंदर एक आम आदमी को कैसा जीवन जीना चाहिए,उसके जीवन का आचरण कैसा होना चाहिए,पारिवारिक जीवन में उसे किन मर्यादाओं का पालन करना चाहिए,मित्र के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए,भाई भाई का सम्बंध कैसा होना चाहिए,हमें किस प्रकार अनीति के खिलाफ लड़ना चाहिए ये सब राम चरित मानस में भरा पड़ा है।राम कथा सुनने का उद्देश्य यह होना चाहिए कि लोग श्री राम की तरह श्रेष्ठ आचरण करें।केवल समय विशेष पर कथा सुन लेना पर्याप्त नहीं होता कथा को सुने,समझे,अपने हृदय में धारण करें और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें।तभी कथा सुनने की सार्थकता होगी।वहीं दोपहर में अपने प्रवचन के दौरान श्री विजय दास जी ने जो अंगूठी श्रीराम के हाँथ में सीता की खोज के समय राम ने हनुमान जी को सीता के पहचान के रूप में दिखाए थे उस अंगूठी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंगूठी माया रहित थी जो ब्रह्मा जी के कमंडल से निकली थी ।देवासुर संग्राम के समय अंगूठी को ब्रह्मा जी ने देवराज इंद्र को दिया था।संग्राम जीतने के उपरांत इंद्र ने उस अंगूठी को दशरथ जी को दे दिया,दशरथ जी ने कौशल्या माता को और कौशल्या ने अपनी प्रिय पुत्र वधु सीता को मुंह दिखाई स्वरूप दिया था।परिसर में कथा के पूर्व यज्ञ मंडप की परिक्रमा हेतु भक्तों की भीड़ रह रही है।रात्रि में मथुरा से आये हुए कलाकार रासलीला का सजीव मंचन कर रहे हैं।अनिल सिंह,मनोज सिंह,भानु दुबे,रवींद्र तिवारी,ध्रुवनारायण पांडेय,जेलर,गोलू आदि लोग व्यवस्था में लगे रहे।
रिपोर्ट-पीयूष श्रीवास्तव


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