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दो चिकित्सकों पर है डेढ़ लाख आबादी की स्वास्थ्य की जिम्मेदारी




रेवती (बलिया) दो चिकित्सकों को डेढ़ लाख आबादी की स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी वहन करना पड़ रहा है। हैंड की कमी व समुचित चिकित्सा उपकरणों के अभाव में इसका पूरा लाभ आम जनता को नही मिल पा रहा है। 

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवती पर एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड मशीन आदि के अभाव में मरीजों का बेहतरीन उपचार नही हो पा रहा है। सीएचसी परिसर में सन 2014 में लाखों की लागत से बना रैन बसेरा का अब तक लोकार्पण नही हो पाया है। खर पतवार से आच्छादित रैन बसेरा का आज तक उपयोग नही हो पाया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर लगा आर०ओ० मशीन भी बीते तीन माह से बंद है। दो सप्ताह पूर्व सीएचसी पर आया एक्स-रे मशीन संसाधन, हैंड के अभाव तथा टेक्नीशियन की कमी से दिखाऊ साह का डाल बन कर रह गया है। चीफ फार्मासिस्ट का पद भी एक वर्ष से खाली चल रहा है। छः के साक्षेप में यहां प्रभारी अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार के अलावा डॉ. धर्मराज मात्र दो चिकित्साधिकारी कार्यरत हैं। ओपीडी में प्रति दिन लगभग 400 मरीजों का उपचार होता है। प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक के अवकाश व मिटिंग आदि में रहने पर एक मात्र चिकित्साधिरी डॉ. धर्मराज पर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है। हालांकि संविदा पर कार्यरत आयुष महिला चिकित्सक डॉ. अनिता यादव व डॉ. ए.के. वर्मा के रहने से मरीजों को कुछ राहत रहती है।

नगर के समाजसेवी कनक पांडेय का कहना है कि यहां आर्थों के एक चिकित्साधिकारी की नियुक्ति हो जाए तो एक्सीडेंटल केश के मरीजों का उपचार यहां भी संभव हो जाएगा। प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक एक्सीडेंटल केस यहां आते हैं। सर्जन व आर्थों डॉक्टर के अभाव में मरीजों को सीधे बलिया रेफर होना पड़ता है। जिससे कभी-कभी बीच रास्ते में ही मरीज की मृत्यु हो जाती है।

प्रभारी अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि एक अतिरिक्त चिकित्साधिकारी, चीफ फार्मासिस्ट तथा कुछ संशाधन बढ़ाने के लिए सीएमओ बलिया से मांग की गई है।


पुनीत केशरी

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