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सावधान! जीवन की रंगोली में न भरने पाए कोरोना का रंग

 


रतसर (बलिया) पर्यावरण को बचाना आज हमारी सबसे बड़ी जरूरत है। विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति का लगातार दोहन हो रहा है। ऐसे में समन्वय बना रहे इस पर हमें ध्यान देना होगा। हमारी परम्परा और संस्कृति में पर्यावरण के संरक्षण की बात कही गई है। पर्यावरण के वगैर मानवीय जीवन का अस्तित्व संभव नही है। दीपावली साफ सफाई का पर्व है। दीपावली बुराई पर अच्छाई का पर्व है। त्योहारों में खुशियां बरकरार रखने के लिए जरूरी है कि हर कदम पर कोरोना को लेकर पूरी सावधानी बरते ताकि उत्सव के साथ जीवन की रंगोली में कोरोना का रंग कतई न भरने पाए। इस दौरान बाजार में भीड़ लगाने से बचे। स्थानीय उत्पादों को तरजीह दे ताकि छोटे-छोटे कामगारों के जीवन को भी दीप पर्व के प्रकाश से जगमग किया जा सके। पटाखों की चंद सेकेंड की रोशनी और धमक पूरे जीवन को स्याह बना सकती है। इसलिए इस दीपावली घर परिवार को पटाखों से दूर रखकर कोरोना से खुद को सुरक्षित बनाने के साथ ही दूसरों को भी सुरक्षित बनाने का नेक काम किया जा सकता है। कोरोना काल में दीपावली का त्योहार कैसे मनाए इस सम्बन्ध में जनऊबाबा साहित्यिक संस्था निर्झर के अध्यक्ष प्रेमनारायन पाण्डेय ने बताया कि कोरोना का खतरा अभी बरकरार है इसलिए आने वाले पर्व में भी अलर्ट रहे। जितना सम्भव हो सके घरों पर ही परिवार के साथ त्योहार का आनन्द ले। अध्यात्मवेता पं० भरत पाण्डेय ने बताया कि दीपावली के साथ ही छठ पूजा की खरीददारी के लिए बाजार में अभी से अच्छी खासी भीड़ देखी जा सकती है। खरीददारी के वक्त मास्क से मुंह व नाक अच्छी तरह से ढकने के साथ ही शारीरिक दूरी बनाकर रखे। दुकान में प्रवेश करते समय और निकलते वक्त हाथों की अच्छी तरह सेनेटाइजर करना भी न भूले। राज्यपाल सम्मान से सम्मानित पूर्व प्रधानाचार्य श्रीकान्त पाण्डेय ने बताया कि कोरोना काल में लोगों के सामने रोजी रोटी की दिक्कत को देखते हुए ही प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने "वोकल फार लोकल " का नारा दिया था।उस नारे को सही साबित करने का यही सही मौका है। इसके अलावा स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार लक्ष्मी-गणेश की आकर्षक मुर्तियों को तरजील देना हम सभी का कर्तव्य भी बनता है। पूर्व एसडीओ इ०तारकेश्वर पाण्डेय ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए बाहर की सामग्री पर निर्भर न रहे बल्कि घर पर ही तरह-तरह के पकवान बनाए और पूरे परिवार के साथ उसकी मिठास का आनन्द उठाए। बाहर की मिठाइयां,नमकीन व अन्य फास्ट फूड न जाने कितने हाथों से होकर आपके अपनों तक पहुंचता है। ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ जाता है।


रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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