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उत्कृष्ट कार्यशैली की बदौलत आशा सीटन देवी समुदाय के लिए बनीं मसीहा


 

 - बेहतर समाज बनाने को समर्पित आशा सीटन देवी

बलिया, 8 मार्च 2022

कम पढ़ी लिखी होते हुए भी समाज की कुरीतियों और परंपरागत सोच से अलग हटकर आशा सीटन देवी ने अपने बच्चों व परिवार के साथ-साथ समुदाय के लिए बेहतर कार्य करके जनमानस में एक मिशाल पेश की। सीटन देवी में अपने परिवार और समाज का जीवन स्तर बेहतर बनाने की प्रबल इच्छा थी। इस तरह आशा सीटन देवी समुदाय के लिए बनीं मसीहा। 

सीटन देवी बताती हैं कि उनका चयन आशा कार्यकर्ता के रूप में हो गया । ऐसे में जब आगे बढ़कर कुछ करने का मौका मिला, तो दृढ़ निश्चय किया कि घर-परिवार और गाँव की हालत बदल कर रहूँगी। उन्होने काम शुरु किया, तो सामने समाज की अशिक्षा, गरीबी, जाति भेदभाव, लोगों में जागरुकता की कमी, महिलाओं की स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता, अंधविश्वास, टीकाकरण न कराना, घर पर प्रसव को पसंद करने जैसी बड़ी चुनौतियाँ थीं। 

सबसे पहले साफ़-सफाई के बारे में गाँव वालों को जागरुक किया।जब थोड़ा बदलाव आया, तो मेहनत सफल होती दिखी।अगले कदम के रूप में कार्यक्षेत्र जवही दियर में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर लोगों को टीकाकरण का महत्व समझाया। पहली बार शिविर के लिए घर-घर जाकर लोगों को इकठ्ठा किया। निरंतर प्रयास करते रहने से अब प्रत्येक बुधवार और शनिवार को आयोजित होने वाले ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) व अन्य शिविरों में लोग खुद भी पहुँचने लगे हैं। जहाँ से सभी के स्वास्थ्य की जाँच, बच्चों को टीके, किशोरियों और गर्भवती को सेहत की बातें  बताने में आसानी हुयी है।

सूझबूझ से बचाई माँ-बच्चे की जान :-

सीटन देवी बताती हैं कि पिछले वर्ष उनके कार्यक्षेत्र में एक मंद बुद्धि महिला गर्भवती थी। गर्भावस्था के पहले-दूसरे महीने में वह महिला अपने मायके चली गयी, जिस वजह से उसकी जरूरी जांचें नहीं हो पायीं और बच्चा ख़राब हो गया| इसकी जानकारी जब उन्हें मिली, तो बहुत दुःख हुआ। जब वह महिला दोबारा गर्भवती हुयी, तो उसके पति और जिठानी को बार-बार प्रेरित कर उसकी प्रसव पूर्व की चार जांचें करवाई, हीमोग्लोबिन कम होने पर आयरन-सुक्रोज चढ़वाया और आयरन-फोलिक एसिड गोली का सेवन कराने के लिए उसका नियमित फॉलोअप किया। उस महिला का प्रसव पिछले माह फ़रवरी में जिला महिला अस्पताल में हुआ। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। 

वह बताती हैं कि उनके कार्यक्षेत्र जवही दियर में कुछ परिवार ऐसे थे, जो अपने बच्चों को टीका लगवाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं होते थे। ऐसे में मैंने उन परिवारों का नियमित फॉलोअप किया, उन्हें टीकाकरण कराने से होने वाले फायदों और न कराने से होने वाली जानलेवा बीमारियों के बारे में बताया उनके सामने आसपास के दूसरे बच्चों की मिशाल रखी, उन्हें टीका लगा और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। आज नतीजा यह है कि लगभग सभी परिवार अपने बच्चों को टीका लगवाने के लिए सत्र स्थल पर खुद पहुँचते हैं। 

स्वास्थ्य आंकड़ों में आया सुधार:-

बीसीपीएम संजय यादव का कहना है कि सीटन के प्रयास और सहयोगात्मक पर्यवेक्षण से उनके कार्यक्षेत्र के स्वास्थ्य आंकड़ों में बेहद सुधार आया है| पहले जहाँ 38 फ़ीसदी गर्भवती महिलाओं का ही चिन्हांकन हो पता था। वह अब बढ़कर 62 फ़ीसदी तक पहुँच गया है| शून्य से 2 वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण की दर 25 से बढ़कर 51 फ़ीसदी, संस्थागत प्रसव 25 से बढ़कर 36, पूर्ण प्रतिरक्षण 35 से बढ़कर 49 हुआ है।  इसके अलावा पहले जो परिवार टीकाकरण नहीं करवाते थे, वहीं टीकाकरण कराने लगे हैं।  इसी प्रकार महिल नसबंदी में इनका बहुत सहयोग रहा है। काम के प्रति लगन और मेहनत देखकर  कोरोना काल में बेहतर प्रदर्शन के लिए  उन्हें बेलहरी ब्लॉक  में प्रथम स्थान के पुरस्कार से सम्मानित किया गया और  पुरुष नसबंदी के लिए बेलहरी ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा, बीपीएम, बीसीपीएम के द्वारा सम्मानित किया गया ।  सीटन देवी बताती है की अब मुझे गांव और आसपास के लोगों के द्वारा सम्मान और इज्जत मिलती है, और मुझे भी बहुत खुशी होती है।


रिपोर्ट त्रयंबक नारायण देव गांधी

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