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आस्था का केंद्र है मां पचरूखा देवी का मंदिर

 



रेवती - बलिया : जनपद मुख्यालय से 27 किलोमीटर पूरब तथा रेवती से 3 किलोमीटर पश्चिम सहतवार मार्ग पर पचरूखा गायघाट स्थित माँ पचरूखा देवी का मंदिर काफी समय से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। शारदीय व चैत्र नवरात्र में दर्शनार्थियों का रेला लगा रहता है। चैत्र रामनवमी के दिन यहां एक दिवसीय मेला भी लगता है। 

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इतिहास

मान्यता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां मंदिर के स्थान पर घनघोर जंगल व एक टीला था। पांच वट वृक्षों के बीच पिन्डी होने से इनका नाम पचरूखा देवी पड़ा। लगभग पांच सौ वर्षों तक अपने शासन के दौरान निकुंभ राजपूतों द्वारा मां पचरूखा को कुल देवी के रूप में पूजा की जाती थी। बाद में सन 1857 में वीर कुंवर सिंह अंग्रेज सैनिकों से युद्ध करतें हुए पचरुखा देवी के स्थान पर पहुंच गए। विश्राम की अवस्था में अचानक कुवर सिंह को एक दिव्य ज्योति पुंज ने दर्शन दिया। 

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 विशेषता

सन 1929 - 30 में गायघाट के रहने वाले सरयू प्रसाद वैश्य का लाखो का व्यापार चौपट हो गया। वह अपने पास बचे मात्र दो हजार रूपए लेकर माता के स्थान पर पहुंचे तथा देवी मंदिर का जीणोद्धार कराया। आज देवी की कृपा से उनके परिवार का व्यवसाय वाराणसी में फल फूल रहा है। यहां मंदिर से सटे तुलसी मानस मंदिर में राम, जानकी, लछमण, हनुमान तथा तुलसीदास की सुन्दर प्रतिमाएं स्थापित है। सन 2019 - 20 भारत सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा इस परिसर का विस्तार व सौंदर्यीकरण किए जाने से मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।


पुनीत केशरी

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