जानें अपना राशिफल, इन राशि वालों के लिए का दिन विशेष
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 07 सितम्बर 2026*
*⛅दिन - सोमवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - दक्षिणायण*
*⛅ऋतु - शरद*
*⛅मास - भाद्रपद*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - एकादशी शाम 05:03 तक तत्पश्चात् द्वादशी*
*⛅नक्षत्र - पुनर्वसु शाम 06:14 तक तत्पश्चात् पुष्य*
*⛅योग - व्यतीपात प्रातः 06:41 तक, तत्पश्चात् वरीयान् प्रातः 03:38 सितम्बर 08 तक, तत्पश्चात् परिघ*
*⛅राहुकाल - सुबह 07:44 से सुबह 09:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:11*
*⛅सूर्यास्त - 06:39 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:00 से दोपहर 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:02 से मध्यरात्रि 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - अजा एकादशी, सर्वार्थसिद्धि योग (शाम 06:14 से प्रातः 06:11 सितम्बर 08 तक)*
*🌥️विशेष - एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🔹सात प्रकार की पत्नियाँ🔹*
*🔸इसमें ३ प्रकार की स्त्रियाँ बुरी और अवांछनीय होती हैं ।*
*🔸इसमें से पहले प्रकार की स्त्रियाँ परेशान करनेवाली होती हैं । वे दुष्ट स्वभाववाली, क्रोधी व दयारहित होती हैं और साथ ही पति के प्रति वफादार नहीं होतीं, परपुरुषों में प्रीति रखती हैं ।*
*🔸दूसरी चोर की तरह होती हैं । वे अपने पति की सम्पदा को नष्ट करती रहती हैं या उसमें से अपने लिए चुराकर रखा करती हैं ।*
*🔸तीसरी क्रूर मालिक की तरह होती हैं । वे करुणारहित, आलसी व स्वार्थी होती हैं । वे हमेशा अपने पति व औरों को डॉटती रहती हैं ।*
*🔹अन्य ४ प्रकार की स्त्रियाँ अच्छी और प्रशंनीय होती हैं । वे अपने अच्छे आचरण से आसपास के लोगों को सुख पहुँचाने का प्रयास करती हैं ।*
*🔸इनमें से पहले प्रकार की माँ की तरह होती हैं । वे दयालु होती हैं और अपने पति के प्रति ऐसा स्नेहभाव रखती हैं जैसे एक माँ का एक पुत्र के प्रति होता है । पति की कमाई, घर की सम्पदा व लोगों की समय-शक्ति का व्यर्थ व्यय न हो इसकी वे सावधानी रखती हैं ।*
*🔸दूसरी बहन की तरह होती हैं । वे अपने पति के प्रति ऐसा आदरभाव रखती हैं जैसा एक बहन अपने बड़े भाई के प्रति रखती हैं । वे विनम्र और अपने की इच्छाओं के प्रति आज्ञाकारी होती हैं ।*
*🔸तीसरी मित्र की तरह होती हैं । वे पति को देख उसी तरह आनंदित होती हैं जैसे कोई अपने उस सखा को देखकर आनंदित होता है जिसे उसने बहुत समय से देखा नही था । वे जन्म से कुलीन, सदाचारी और विश्वसनीय होती हैं ।*
*🔸चौथी दासी की तरह होती हैं । जब उनकी कमियों को इंगित किया जाता है तब वे एक समझदार पत्नी की रूप में व्यवहार करती हैं । वे शांत रहती हैं और उनका पति कभी कुछ कठोर शब्दों का उपयोग कर देता है तो भी वे उसको सकारात्मक लेती हैं । वे अपने पति की इच्छाओं के प्रति आज्ञाकारी होती हैं ।*
*🔹(अपने परिवार के लोगों व अपने सम्पर्क में आनेवाले अन्य लोगों के साथ अपना व्यवहार कैसा होना चाहिए – यह जानने तथा अपने व्यवहार को मधुर बनाने हेतु पढ़ें पूज्य बापूजी के सत्संग आधारित सत्साहित्य ‘मधुर व्यवहार’ व ‘प्रभु-रसमय जीवन’। ये सत्साहित्य आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध हैं ।)*
*📖ऋषि प्रसाद – सितम्बर २०१९ से*


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