भगवान की प्राप्ति कठिन तपस्या से नहीं,बल्कि नाम स्मरण से ही संभव हैं:चिन्मयानंद बापू
गड़वार(बलिया)भगवान की प्राप्ति कठिन तपस्या या जटिल अनुष्ठानों से नहीं,बल्कि मात्र नाम स्मरण से ही संभव हैं। उक्त बातें श्री जंगली बाबा धाम ट्रस्ट गड़वार के तत्वाधान में आयोजित हरिहरात्मक महायज्ञ में रामकथा के चौथे दिन हरिद्वार से पधारे अन्तर्राष्ट्रीय कथावाचक चिन्मयानंद बापू ने मानस मंच से प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु श्रोतागणों से कथा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि कलियुग को तुलसीदास जी ने चारो युगों में सबसे अच्छा माना हैं, क्योंकि इस युग में भगवान की प्राप्ति कठिन तपस्या या जटिल अनुष्ठानों से नहीं,बल्कि मात्र नाम स्मरण से ही संभव हैं। बापू ने बताया कि सतयुग में हजारों वर्षों की तपस्या के बाद भी भगवान का दर्शन सुनिश्चित नहीं था। मनु-शतरूपा ने नैमिषारण्य में 23 हजार वर्ष तक तपस्या की,तब जाकर भगवान का दर्शन हुआ। त्रेता युग में यज्ञों का विधान था। महाराज दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रभु अवतरित हुए। द्वापर में पूजा-पाठ से भगवान मिल जाते थे,किंतु कलियुग में अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हुए केवल भगवान का नाम स्मरण ही मुक्ति का सरल मार्ग हैं। कथा के बीच-बीच में जब भजनों की स्वर लहरियां उठीं तो श्रोता भाव विभोर हो गए। कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। पूरा पंडाल सीताराम-सीताराम की ध्वनि से गुंजायमान हो गया। श्री जंगली बाबा धाम सेवा ट्रस्ट के संयोजक पंडित राहुल जी ने बताया कि दो से पांच नवम्बर तक वृन्दावन से पधारे अन्तर्राष्ट्रीय कथावाचक पुंडरीक महाराज जी के श्रीमुख से कृष्ण कथा का आयोजन होगा। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर थाना प्रभारी हितेश कुमार अपने दल-बल के साथ यज्ञ स्थल पर चक्रमण करते नजर आए।
रिपोर्ट : डी.पाण्डेय


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