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बालू खनन के लिए छह माह व तीन माह के लिए पट्टा होगा स्वीकृत: डीएम



जिनके खेत में बालू जमा है, उनके लिए शासन की ओर से दी गई है व्यवस्था

बलियाः जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने बताया कि बालू खनन के सम्बन्ध में शासन की ओर से तीन व्यवस्था लागू है। शासन द्वारा ई-निविदा सह ई-नीलामी के माध्यम से प्रदेश में पांच वर्षीय खनन पट्टा स्वीकृत किया जा रहा है। इसके अलावा ऐसे किसान, जिनके खेत में बाढ़ के कारण बालू जमा हो गयी है और वह उसे हटवाकर खेती योग्य भूमि बनाना चाहता है तो इसके लिए खनन विभाग में दो हजार रूपए फीस के साथ निर्धारित प्रपत्र को भरकर तीन प्रतियों में जमा करना होगा। इसमें भू-कर सर्वेक्षण, मानचित्र की प्रतियां, जिसमें आवेदित क्षेत्र स्पष्ट रूप से चिन्हांकित हो, के साथ आवेदन कर सकता है। सम्बन्धित तहसील से जांच कराने के बाद 130 रूपए प्रति घनमी की दर से रायल्टी जमा कराकर अनुज्ञा पत्र जारी कर दिया जाएगा। यह पट्टा तीन महीने के लिए होगा। जिलाधिकारी ने बताया कि यह कार्यवाही एक हफ्ते के अंदर ही पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी काश्तकार के खेत में साधारण बालू उपलब्ध है और वह उसको खनन करना चाहता है तो वह खनन के लिए अपनी भूमि देने का सहमति पत्र जिलाधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करेंगे। खनन विभाग उक्त क्षेत्र की वन विभाग से अनापत्ति प्राप्त कर ई-निविदा प्रणाली के माध्यम से स्वीकृत करने की कार्रवाई करेगा। बशर्ते, ऐसा क्षेत्र एक हेक्टेयर क्षेत्रफल से कम न हो। अगर किसी कारणवश पट्टा भूमिधर के पक्ष में नहीं हुआ तो रायल्टी का 20 प्रतिशत की धनराशि भूमिधर को मुआवजा के तौर पर मिलेगी। यह खनन पट्टा छह महीने के लिए होगा। 

बालू, मोरंग, गिट्टी ढ़ोने के लिए वैध परिवहन प्रपत्र रखना जरूरी


- जिलाधिकारी ने बताया है कि जनपद में बालू, मोरंग, गिट्टी आदि का परिवहन करने वाले वाहनों को वैध परिवहन प्रपत्र रखना जरूरी होगा। इसमें जहां से खनिज लाया जा रहा है और जहां जा रहा है, उसका स्पष्ट जिक्र हो। साथ ही वाहन पर लोड खनिज की मात्रा और प्रपत्र जारी करने व समाप्ति की तारीख भी लिखी हो। जिलाधिकारी ने साफ किया है कि बिना परिवहन प्रपत्र या उसमें लिखित मात्रा से अधिक लोडिंग या निर्धारित अवधि बीतने के बाद परिवहन कर रहे वाहनों के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 

बिना आईएसटीपी के अन्य राज्यों से नहीं आएंगे वाहन


- जिलाधिकारी ने बताया कि अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को 50 रूपए प्रति घनमी की दर से अन्तर्राज्यीय अभिवहन पास (आईएसटीपी) भी रखना होगा। यह पास बनवाने के लिए वाहन स्वामी को खनिज विभाग के विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। नाम, पिता का नाम, निवास का पता, मोबाइल नम्बर, ईमेल आईडी के आधार पर यह रजिस्ट्रेशन होगा। आईएसटीपी नहीं होने पर परिवहन अवैध माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई भी होगी। 


दस ट्राली से अधिक मिट्टी खनन के लिए पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य


- जिलाधिकारी ने बताया कि शासन द्वारा मिट्टी की रायल्टी शून्य कर दी गयी है। कोई भी काश्तकार अपने निजी उपयोग के लिए 10 ट्राली या अधिकतम 40 घनमी. मिट्टी खनन कर सकते हैं। सिर्फ सम्बन्धित एसडीएम या तहसीलदार या खनन विभाग में आवेदन कर आसानी से अनुमति ले सकते हैं। वहीं, 10 ट्राली से अधिक मिट्टी के लिए माईनिंग प्लान जारी कराना अनिवार्य है, जो जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद ही जारी होगा। इसके अलावा पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र पर्यावरण निदेशालय, लखनऊ से लेना होगा। उन्होंने बताया कि खनन के सम्बन्ध में अधिक जानकारी लेने के लिए किसी भी कार्यदिवस में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित खनन विभाग में सम्पर्क कर सकते हैं।

प्रवर्तन के लिए बनेगी विशेष पुलिस दस्ता


- डीएम श्रीहरि प्रताप शाही ने अवैध खनन पर निगरानी रखने के लिए डिप्टी कलेक्टर संगम लाल यादव को नोडल अधिकारी नामित किया है। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक की ओर से एक विशेष पुलिस टीम का भी गठन किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इस पर रोकथाम के लिए सम्बन्धित एसडीएम, तहसीलदार व खनन अधिकारी को भी जिम्मेदारी दी है। जिलाधिकारी ने जनसामान्य की जानकारी के लिए कलेक्ट्रेट परिसर व तहसील कार्यालयों में खनन नियमावली के जरूरी विन्दुओं से सम्बंधित होर्डिंग लगवाने के निर्देश दिए हैं।



रिपोर्ट : धीरज सिंह

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