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ओपीडी सेवा स्थगित होने के बावजूद सामान्य मरीजो की भीड़ से चिकित्सक परेशान



रतसर(बलिया) कोरोना वायरस  से लड़ने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की कोई तैयारी नही दिख रही है। ग्राम प्रधान से लगायत संबंधित उच्चाधिकारी अभी तक ग्रामीणों के बीच नही पहुंचे है। लाक डाउन के दूसरे दिन अफरा तफरी के बीच जरूरत की चीजों के लिए लोग भागदौड़ करते दिखे लेकिन साफ सफाई पर किसी का ध्यान नही रहा। केंद्र सरकार हो या प्रदेश सरकार आमजन की सहुलियत के लिए तमाम घोषणाएं की है लेकिन उनके अनुपालन में संबंधित विभाग क्या कर है यह अभी यक्ष प्रश्न बना हुआ है।  गांवों में साफ सफाई की स्थिति नाजुक है। गांव को सेनेटाइज करने के सवाल पर ग्राम प्रधान रतसड़ कलां स्मृति सिंह ने कहा कि हम भी लाक डाउन का पालन कर रहे है । गांव की सफाई और सेनेटाइज करने का जिम्मा पुलिस विभाग व जिला प्रशासन की है। वहीं स्थानीय सीएचसी प्रभारी डा.रकीब अख्तर ने बताया कि गांवों को सेनेटाइज करने के लिए हमें कोई दिशा निर्देश नही मिला है ना ही यहां कोई सामान है ना ही कोई सुविधा है। दूसरी तरफ कोरोना इमरजेंसी के कारण सीएचसी की ओपीडी सेवा स्थगित की गई है। फिर भी मरीजों की भारी भीड़ चिकित्सकों के यहां जुटी दिखी। यहां भी सोशल डिस्टेंस नही देखने को मिला। सीएचसी के फार्मासिस्ट अरूण कुमार ने बताया कि बार बार समझाने के बाद भी लोंग नही मान रहे है और भीड़ लगा दे रहे है। जिससे करोना इमरजेंसी में कार्य करना जोखिमपूर्ण हो गया है। लाक डाउन के पहले दिन यहां डिलिवरी के लिए छ महिला पहुंची तो दूसरे दिन दोपहर तक डिलिवरी के लिए एक महिला को लाया गया था। लेबर रूम के इर्दगिर्द तमाम महिलाएं समूह में बैठी दिखी। जब उनको कोरोना से बचाव के लिए समझाया गया तो वह अपना ही राग अलापती रही।


रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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