Breaking News

> > >

पीएम मोदी ने कहा: देश में 3 मई तक लॉकडाउन, 20 अप्रैल से कुछ जरूरी चीजों को अनुमति, कोरोना फैला तो परमिशन वापस


दिल्ली. 25 मार्च को लागू हुआ 21 दिन का देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने नहीं जा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के नाम संबोधन में इसे 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा की। 25 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 20 अप्रैल से कुछ जरूरी चीजों की अनुमति दी जाएगी। अगर आपके इलाके में कोरोना पैर पसारता है तो ये अनुमति तुरंत वापस ले ली जाएगी। 26 दिन में मोदी का देश के नाम यह चौथा संदेश था।
मोदी के भाषण की 10 बातें
1. कष्ट सहकर देश को बचाया
कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई बहुत मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। आप सभी देशवासियों की तपस्या और त्याग की वजह से भारत अब तक कोरोना से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टालने में सफल रहा। आप लोगों ने कष्ट सहकर भी अपने देश और भारत वर्ष को बचाया है। मैं जानता हूं कि आपको कितनी दिक्कतें आई हैं। किसी को आने जाने की परेशानी, कोई घर-परिवार से दूर है। लेकिन आप देश की खातिर एक अनुशासित सिपाही की तरह अपने कर्तव्य निभा रहे हैं। मैं आप सभी को आदरपूर्वक नमन करता हूं।
देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग त्योहारों का भी समय है। बैसाखी जैसे त्योहारों के साथ कई राज्यों में नए वर्ष की शुरुआत हुई है। लॉकडाउन के बंधनों के बीच देश के लोग जिस तरह नियमों का पालन कर रहे हैं, जितने संयम से अपने घरों में रहकर त्योहार बड़ी सादगी से मना रहे हैं, ये सारी बहुत प्रेरक और प्रशंसनीय हैं। मैं नए वर्ष पर आपके और आपके परिवारजन के उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना करता हूं।
2. ‘वी द पीपल’ की ताकत
हमारे संविधान में जिस वी द पीपल ऑफ इंडिया की शक्ति की बात कही गई है, वह यही तो है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर हम भारत के लोगों की तरफ से अपनी सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन और संकल्प बाबा साहब को श्रद्धांजलि है। बाबा साहब का जीवन हमें हर चुनौती को अपनी संकल्प शक्ति और परिश्रम के बूते पर पार करने की निरंतर प्रेरणा देता है। मैं सभी देशवासियों की तरफ से बाबा साहब को नमन करता हूं।
3. समय पर बचाव के प्रयास शुरू किए
आज पूरे विश्व में कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है, हम सब उससे भली-भांति परिचित हैं। अन्य देशों के मुकाबले भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए हैं, आप इसके सहभागी भी रहे हैं और साक्षी भी। जब हमारे यहां कोरोना का एक भी केस नहीं था, उससे पहले ही भारत ने कोरोना प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी। कोरोना के मरीज 100 तक पहुंचे, उससे पहले ही भारत ने विदेश से आए हर यात्री के लिए 14 दिन का आइसोलेशन अनिवार्य कर दिया था। मॉल, थिएटर, क्लब, जिम बंद किए जा चुके थे।
जब हमारे यहां कोरोना के सिर्फ 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बहुत बड़ा कदम उठाया। भारत ने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जैसे ही समस्या दिखी, उसे तेजी से फैसले लेकर उसी समय रोकने का भरसक प्रयास किया। ये ऐसा संकट है, जिसमें किसी भी देश के साथ तुलना करना उचित नहीं है। फिर भी हम कुछ सच्चाइयों को नकार नहीं सकते। ये भी सच्चाई है कि दुनिया के बड़े-बड़े सामर्थ्यवान देशों में कोरोना के आंकड़े देखें तो उनकी तुलना में भारत बहुत संभली हुई स्थिति में है।
4. अप्रोच ने देश को बेहतर स्थिति में रखा
महीना-डेढ़ महीना पहले कई देश कोरोना संक्रमण के मामले में भारत के बराबर खड़े थे, आज उन देशों में भारत की तुलना में कोरोना के मामले 25 से 30 गुना बढ़ गए हैं। उन देशों में हजारों लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है। भारत ने पुलिसिंग और  इंटिग्रेटेड अप्रोच न अपनाई होती, समय पर तेज फैसले नहीं लिए होते तो आज भारत की स्थिति क्या होती, इसकी कल्पना करते ही रोए खड़े हो जाते हैं। लेकिन बीते दिनों के अनुभवों से यह साफ है कि हमने जा रास्ता चुना है, आज की स्थिति में वही हमारे लिए सही है।
सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन का बहुत बड़ा लाभ देश को मिला है। अगर सिर्फ आर्थिक दृष्टि से देखें तो यह महंगा जरूर लगता है, बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है, लेकिन भारतवासियों की जिंदगी के आगे इसकी कोई तुलना नहीं हो सकती। सीमित संसाधनों के बीच भारत जिस मार्ग पर चला है, उस मार्ग की चर्चा आज दुनियाभर में होना बहुत स्वाभाविक है। देश की राज्य सरकारों, स्थानीय स्वराज संस्थाओं की इकाइयों ने भी इसमें बहुत जिम्मेदारी के साथ काम किया है।
5. सबके सुझावों के आधार पर ही फैसला
चौबीसों घंटे हर किसी ने जिम्मा संभालने का प्रयास किया है। इन सब प्रयासों के बीच कोरोना जिस तरह फैल रहा है, उसने विश्वभर में हेल्थ एक्सपर्ट्स और सरकारों को और ज्यादा सतर्क कर दिया है। भारत में भी कारोना को लेकर लड़ाई आगे कैसे बढ़े, हम विजयी कैसे हो, हमारे यहां नुकसान कम से कम कैसे हो, लोगों की दिक्कतें कम कैसे करें, इन बातों को लेकर निरंतर चर्चा की है। इन सभी चर्चाओं में से एक बात उभरकर आती है, हर किसी का यही सुझाव आता है, नागरिकों की तरफ से भी यह सुझाव आता है कि लॉकडाउन को बढ़ाया जाए।
कई राज्य तो पहले से ही लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला कर चुके हैं। सारे सुझावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है कि लॉकडाउन को अब 3 मई तक बढ़ाना पड़ेगा। यानी 3 मई तक हम सभी को, देशवासियों को लॉकडाउन में ही रहना होगा। इस दौरान हमें अनुशासन का उसी तरह पालन करना है, जैसे हम करते आ रहे हैं। मेरी सभी देशवासियों से यह प्रार्थना है कि अब कोरोना को हमें किसी भी कीमत पर नए क्षेत्रों में फैलने नहीं देना है।
6. संक्रमित और मौतों की संख्या रोकनी होगी
स्थानीय स्तर पर अगर एक भी मरीज बढ़ता है तो यह हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए। कहीं भी कोरोना से एक भी मरीज की दुखद मृत्यु होती है तो हमारी चिंता और बढ़नी चाहिए। इसलिए हमें हॉटस्पॉट्स को इंगित करते पहले से भी ज्यादा, बहुत ज्यादा सतर्कता बरतनी ही होगी। जिन स्थानों के हॉटस्पॉट में बदलने की आशंका है, वहां कड़ी नजर रखनी होगी। नए हॉटस्पॉट का बनना हमारे परिश्रम को और चुनौती देगा। इसलिए अगले एक हफ्ते सप्ताह में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी।
7. बारीकी से मूल्यांकन, कल गाइडलाइन जारी
20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले, हर राज्य को बड़ी बारीकी से परखा जाएगा। वहां लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है, उस क्षेत्र ने कोरोना से खुद को कितना बचाया है, इसका मूल्यांकन लगातार किया जाएगा। ‘‘जो क्षेत्र इस अग्नि परीक्षा में सफल होंगे, जो अपने यहां हॉटस्पॉट नहीं बढ़ने देंगे और जिनके हॉटस्पॉट में बदलने की आशंका भी कम होगी, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति, छूट दी जा सकती है। लेकिन याद रखिए, ये अनुमति सशर्त होगी। बाहर निकलने के नियम बहुत सख्त होंगे। लॉकडाउन के नियम अगर टूटते हैं और कोरोना का पैर हमारे इलाके में पड़ता है तो सारी अनुमति तुरंत वापस ले ली जाएगी।
न खुद कोई लापरवाही करनी है, न किसी और को लापरवाही करने देना है। कल इस बारे में सरकार की तरफ से विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी। 20 अप्रैल से चिह्नित क्षेत्रों में इस सीमित छूट का प्रावधान हमारे गरीब भाई-बहनों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए किया गया है। जो रोज कमाते हैं, रोज की कमाई से जरूरतें पूरी करते हैं। मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता में इन गरीबों की दिक्कतों को कम करना है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के जरिए हमने इसका हर संभव प्रयास किया है। नई गाइडलाइन में भी उनके हितों का ध्यान रखा गया है।
8. दवा-अनाज का पर्याप्त भंडार, फसल कटाई सुगम बनाएंगे
इस समय रबी की फसल की कटाई का काम भी जारी है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रयास कर रही हैं कि किसानों को कम से कम दिक्कत हो। देश में दवा से लेकर राशन तक का पर्याप्त भंडार है। सप्लाई चेन की बाधाएं लगातार दूर की जा रही हैं।
9. एक लाख बेड, 600 अस्पतालों में इलाज
हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ रहा है। जहां सिर्फ एक लैब थी। वहीं अब 220 से ज्यादा लैब टेस्टिंग का काम कर रही हैं। विश्व का अनुभव कहता है कि कोरोना के 10 हजार मरीज होने पर 1500 बेड की जरूरत होती है। भारत में आज हम 1 लाख से अधिक बेड की व्यवस्था कर चुके हैं। 600 से ज्यादा अस्पताल कोविड के इलाज के लिए काम कर रहे हैं। इन सुविधाओं को और तेजी से बढ़ाया जा रहा है। आज भारत के पास भले ही सीमित संसाधन हों, लेकिन मेरा भारत के युवा वैज्ञानिकों से विशेष आग्रह है कि भारत के कल्याण के लिए आप लोग आएं। वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन बनाने का बीड़ा उठाएं। धैर्य बनाकर रखेंगे, नियमों का पालन करेंगे तो कोरोना जैसी बीमारी को परास्त करके रहेंगे।
10. सात बातों में साथ दें
पहली- अपने घर के बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। खासकर ऐसे व्यक्ति जिन्हें पुरानी बीमारी हो, उनकी हमें एक्स्ट्रा केयर करनी है। उन्हें कोरोना से बहुत बचाकर रखना है।
दूसरी- लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की लक्ष्मण रेखा का पूरी तरह पालन करें। घर में बने फेस कवर या मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
तीसरी- अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा जो निर्देश दिए गए हैं, उनका हम पालन करें। गर्म पानी-काढ़ा का निरंतर सेवन करें।
चौथी- कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप जरूर डाउनलोड करें। दूसरों को भी इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करें।
पांचवीं- जितना हो सके, उतनी गरीब परिवार की देखरेख करें। उनके भोजन की अावश्यकता पूरी करें।
छठी- अपने उद्योग में काम करने वाले लोगों के प्रति संवेदना रखें। उन्हें नौकरी से न निकालें।
सातवीं- हमारे सफाईकर्मी, पुलिसकर्मी, डॉक्टर्स का हम सम्मान करें, उनका गौरव करें।’’
मोदी ने कहा- ‘‘इन सात बातों में आपका साथ चाहिए। ये सप्तपदी विजय प्राप्त करने का मार्ग है। पूरी निष्ठा के साथ 3 मई तक लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। जहां हैं, वहां सुरक्षित रखें। वयं राष्ट्रे जागृयाम। इसी कामना के साथ अपनी बात समाप्त करता हूं। आपको और आपके परिवार के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद।’’
सीएम के साथ बैठक में मोदी जान भी, जहान भी नारा दिया था
आठ राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश पहले ही 30 अप्रैल तक लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा कर चुके हैं। इसमें महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, तेलंगाना और तमिलनाडु शामिल हैं। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने भी लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान किया। हालांकि, 11 अप्रैल मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री ने 'जान भी और जहान भी' का नारा दिया था। 
कोरोना पर अब तक प्रधानमंत्री मोदी के 4 संदेश
पहला: प्रधानमंत्री ने 19 मार्च को देश को संबोधित किया था और 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाने की बात कही थी। इस दिन देशभर में सबकुछ बंद रहा। शाम को लोगों ने घरों के अंदर से ही कोरोना फाइटर्स का ताली और थाली बजाकर आभार जताया था।
दूसरा: मोदी ने 24 मार्च को संबोधित किया और कोरोना संक्रमण रोकने के लिए 25 मार्च से 14 अप्रैल तक देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि कोरोना की चेन तोड़ने के लिए लोग घरों में रहने की लक्ष्मण रेखा का पालन करें।
तीसरा: प्रधानमंत्री मोदी ने 3 अप्रैल को एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें लोगों से 5 अप्रैल की रात 9 बजे 9 मिनट के लिए घरों की लाइट बंद कर दीये, मोमबत्ती और मोबाइल की लाइट जलाकर एकजुटता दिखाने की अपील की थी।
चौथा: मोदी ने 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान किया।




साभार- डीबी


No comments