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22 साल पुरानी थी सीओ के साथ विकास की अदावत, परिणित के रुप में दोनों को गंवानी पड़ी जान



कानपुर. गैंगस्टर विकास दुबे और दिवंगत सीओ देवेंद्र मिश्र के बीच 22 सालों से दुश्मनी चल रही थी। जिसका अंत इसी साल जुलाई के शुरुआती 10 दिन में हुआ। 2 जुलाई को बिकरु गांव में विकास और उसकी गैंग ने सीओ देवेंद्र को बेरहमी से मार डाला तो 10 जुलाई को पुलिस ने विकास का कानपुर शहर से 17 किमी दूर भौंती में एनकाउंटर करके 8 पुलिसवालों की मौत का बदला लिया।

बात 1998 की है। गैंगस्टर विकास दुबे को कल्यानपुर थाने की पुलिस ने स्मैक की 30 पुड़ियां के साथ गिरफ्तार किया था। विकास को जब थाने लाया गया ताे वह तत्कालीन थानाध्यक्ष हरिमोहन यादव से भिड़ गया। पुलिसवालों ने चुप कराने की कोशिश की तो वह गाली-गलौज करना लगा। देवेंद्र मिश्र उस वक्त कल्यानपुर में सिपाही थे। देवेंद्र को विकास दुबे की बदसलूकी बर्दाश्त नहीं हुई। उन्होंने बेंत से विकास की जमकर पिटाई की और हवालात में बंद कर दिया। तब विकास ने देवेंद्र मिश्र को देख लेने की धमकी दी थी। कहा जाता है कि उस समय के बसपा विधायक और अब के भाजपा विधायक के अलावा पूर्व सांसद विकास दुबे की पैरवी करने के लिए थाने पहुंच गए थे।

देवेंद्र बांदा जिले के रहने वाले थे। वे साल 1981 में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। विभागीय परीक्षा पास करने के बाद दरोगा बने। साल 2005 में उन्होंने उन्नाव के आसीवन थाने का इंचार्ज बनाया गया। यहां उन्होंने एक शातिर बदमाश का एनकाउंटर किया। जिसकी वजह से उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला। इसके बाद 2016 में गाजियाबाद में तैनाती के दौरान दोबारा आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर पुलिस उपाधीक्षक बने।


कल्यानपुर थाने में सिपाही रहे देवेंद्र मिश्र जब बिल्हौर सर्किल के सीओ बनकर आए तो वे विकास की हर एक गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे। लेकिन सीओ देवेंद्र को विकास के लोकल थाना चौबेपुर से सहयोग नहीं मिल रहा था। सीओ अपने स्तर से विकास के किसी भी गलत काम को नहीं होने दे रहे थे। इस बात को लेकर देवेंद्र और विकास के बीच आमने-सामने भी झड़प हो चुकी थी। दोनों के बीच खुन्नस बढ़ती जा रही थी। वहीं, चौबेपुर थाने के निलंबित एसओ विनय तिवारी की गैंगस्टर विकास से दोस्ती गहरी होती जा रही थी। विनय सीओ की हर एक गतिविधि की जानकारी विकास तक पहुंचाने का काम करता था। इसके साथ विनय गैंगस्टर विकास के कान भरता था कि सीओ उसके एनकाउंटर की तैयारी कर रहे हैं।


कानपुर के चौबेपुर थाना के बिकरु गांव में 2 जुलाई की रात गैंगस्टर विकास और उसकी गैंग ने 8 पुलिसवालों की हत्या कर दी थी। इसमें सीओ देवेंद्र मिश्र भी शामिल थे। अगली सुबह से ही यूपी पुलिस विकास गैंग के सफाए में जुट गई। गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर से सरेंडर के अंदाज में विकास की गिरफ्तारी हुई थी। शुक्रवार सुबह कानपुर से 17 किमी पहले भौंती में पुलिस ने विकास को एनकाउंटर में मार गिराया। गिरफ्तारी के बाद विकास दुबे को इस बात का अंदाजा नहीं था कि कानपुर की सीमा में दाखिल होते ही उसका एनकांउटर हो जाएगा। विकास ने पुलिस की टीम से कहा था कि मेरे खिलाफ सुबूत नहीं जुटा पाओगे। दबिश की रात कहां से गोलियां चल रही थी? कौन गोलियां चला रहा था, किसी ने नहीं देखा है? मैं तो कोर्ट में बोल दूंगा कि मैं तो था ही नहीं। मेरे पास कोई लाइसेंसी असलहा भी नहीं है। चार से पांच साल बाद जमानत हो जाएगी।साभार डीबी


डेस्क

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