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160 साल बाद शुभ अधिक मास का संयोग, अगली बार 2039 में, क्यों खास है ये माह




रतसर (बलिया) यस्मिन मासे न संक्रान्ति, संक्रान्ति द्वयमेव वा। मलमासः स विज्ञेयो मासे त्रिशस्मे भवेतIअर्थात जिस चन्द्रमास में संक्रान्ति न पड़ती हो उसे मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते है । इस साल आने वाले मलमास पर 160 साल बाद शुभ संयोग बन रहा है। इसके बाद ऐसा संयोग साल 2039 में बनेगा। पंचांग के मुताबिक मलमास का आधार सूर्य और चन्द्रमा की चाल से है। सूर्य वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का माना जाता है। वहीं चन्द्रमा वर्ष 354 दिन का माना जाता है। इन दोनों वर्षों के बीच 11 दिन का अन्तर होता है। यह अन्तर तीन वर्ष एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अन्तर को दूर करने के लिए हर तीन वर्ष में एक बार चन्द्रमास या मलमास आ जाता है। इस सम्बन्ध में अध्यात्मवेता पं० भरत जी पाण्डेय ने बताया कि मलमास में मांगलिक कार्य, विवाह, प्राण प्रतिष्ठा, स्थापना, मुण्डन, नवबधु प्रवेश, गृह प्रवेश आदि कार्य वर्जित है। हालांकि खरीददारी आदि की मनाही नही होती है।
मलमास के समय भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। क्योकि श्री हरि विष्णु ही इस मास के अधिपति देव है। मलमास में पूजा पाठ, स्नान, दान आदि के लिए उत्तम माना गया है। इसमें दान का पूण्य कई गुणा प्राप्त होता है।
पौराणिक कथा के अनुसार हर मास के लिए एक देवता निर्धारित है। जब सूर्य और चन्द्रमा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए मलमास प्रकट हुआ तो कोई भी देवता उसका अधिपति बनना स्वीकार नही किया तब ऋषियों -मुनियों ने भगवान विष्णु से निवेदन किया। उनके निवेदन पर भगवान विष्णु मलमास के अधिपति देव बने। उनका एक नाम पुरुषोत्तम है। उस आधार पर ही मलमास का नाम पुरुषोत्तम मास पड़ा।



रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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