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योग साधना एवम ज्योतिष विज्ञान केंद्र का हुआ भव्य उद्घाटन


हल्दी, बलिया।योग साधना एवम ज्योतिष विज्ञान केंद्र का उद्घाटन व एक कुण्डीय हवन का आयोजन क्षेत्र के पचखोरा स्थित शांति कुंज विद्या पीठ में रविवार के दिन किया गया।जिसमें क्षेत्र के सभी ज्योतिषाचार्य व व्याकरणाचार्य उपस्थित रहे।
              क्षेत्र के पचखोरा ढाले पर स्थित शान्ति कुंज विद्यापीठ प्रांगण में रविवार के दिन योग साधना एवम ज्योतिष विज्ञान केंद्र के उद्घाटन समारोह के अवसर के एक कुण्डीय हवन का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदर्श ग्राम पंचायत रतसर (गड़वार) के प्रधान कुमारी स्मृति सिंह रही। कार्यक्रम की शरुआत आचार्य मुकेश चौबे के संरक्षण में विद्वान पंडितो द्वारा देवी देवताओ के आवाहन तथा हवन के साथ किया गया।ततपश्चात आये हुए सभी अतिथियों का माल्यार्पण कार्यक्रम के संयोजक वीरेंद्र शुक्ल द्वारा किया गया।कार्यक्रम के आयोजक व विद्यालय के संस्थापक एवम संरक्षक वीरेंद्र शुक्ल ने कहा कि मेरी शरू से इच्छा रही है कि लोग योग व ज्योतिष को अपनाए आज ये सपना पूरा हो रहा है।इस योग व ज्योतिष विज्ञान केंद्र में इक्छुक युवको को सभी संस्कारो,ज्योतिष व योग की शिक्षा विद्वान ज्योतिषाचार्य व व्याकरणाचार्यो द्वारा निःशुल्क दी जायेगी। व्याकरणाचार्य व तंत्र विशेषज्ञ पंडित उदय नारायण शुक्ल ने कहा कि आज के युग मे योग व ज्योतिष बहुत जरूरी है।आज जो विज्ञान नए नए प्रयोग करके हमे बता रहा है वे हमारे ऋषियों ने ज्योतिष के माध्यम से पहले ही सिद्ध कर दिया था।लेकिन आज ये विद्या विलुप्त होती जा रही है।हमारा देश ऋषि ,मुनियों जा देश है।इस देश से इस विद्या को हमे समाप्त होने से बचाना है।जिससे हमारी संस्कृति बची रहे।हमे पूर्ण विश्वास है कि इस केंद्र के माध्यम से युवाओ को कुछ सीखने का मौका मिलेगा।अन्य ज्योतिष व आचार्य उक्ताओ ने भी अपनी अपनी बात मंच के माध्यम से लोगो के बीच रखा।इस मौके पर पंडित संजय शुक्ल,पंडित विनोद उपाध्याय,पा० आतीश उपाध्याय,पा० केदार पाण्डेय,पा० शोक हरण पाण्डेय,पा० राजन पाण्डेय,पा०दीपक पाण्डेय,पा० अक्षयवर दुबे,अधि देवानंद सिंह,सनिल कुमार सिंह,डॉ० सुरेंद्र सिंह,खड़ग बहादुर सिंह(योग शिक्षक एवम लोक सेवक गायत्री परिवार),प्रेम चंद्र,कृष्णा नंद गिरी,राजनाथ यादव,अरुण शुक्ल,सहित कई लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजक विजय शंकर यादव प्रधान पंचखोरा,अध्यक्ष विनय शंकर सिंह ,संचालन पंडित पिंटू शुक्ल ने किया। 


आतीश उपाध्याय

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