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तपस्या जैसा फल कलयुग में प्रभु का नाम जपने से मिलता है: अनाम जी महाराज




रतसर (बलिया) कोरोना संक्रमण काल को देखते हुए सरकार ने सभी मन्दिरों में सीमित दायरे में सादगी पूर्ण तरीके से उत्सव मनाये जाने का दिशानिर्देश दिया है। नतीजतन इसके अनुपालन में वैश्विक महामारी के चलते सभी धार्मिक गतिविधियों पर पूर्णतया प्रतिबन्ध सा लग गया है। बीते माह कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सादगी से मनाया गया लेकिन कृष्ण के जन्म का छठिहार जो कि बड़े धूमधाम से मनाया जाता है उसकी रौनक इस बार कहीं देखने को नही मिला। क्षेत्र के मंदिरों में कृष्ण जन्मोत्सव का डोल रखने के बाद अब जाकर एक एक कर  क्षेत्र के मंदिरों में छठिहार का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में सवा माह बाद विकास खण्ड गड़वार क्षेत्र के कोड़रा गांव स्थित राधा कृष्ण मन्दिर पर श्री अनाम जी महाराज एवं बालक दास जी के  संयोजकत्व में गुरुवार को छठिहार का आयोजन हरिनाम संकीर्तन के आयोजन के साथ हुआ।तत्पश्चात शुक्रवार को हवन पूजन एवं भण्डारे का आयोजन किया गया। भंडारे में सोशल दूरी का ध्यान रखा गया और  श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण हुआ। इस अवसर पर अनाम दास जी महाराज ने बताया कि कलयुग में भगवान की प्राप्ति का सबसे सरल  साधन उनका नाम जप ही बताया गया है। श्रीमद्भागवत का कथन है कि कलयुग दोषों का भण्डार है। इसमें एक बड़ा सद्गुण यह है कि सतयुग में भगवान को ध्यान, तप और त्रेता युग में यज्ञ - अनुष्ठान, द्वापर युग में पूजा-अर्चना से जो फल मिलता था कलयुग में वह पुण्य श्री हरि के नाम संकीर्तन मात्र से ही प्राप्त हो जाता है। त्रेता युग में लोग सैकड़ों वर्ष यज्ञ करते थे तो उन्हे फल मिलता था, वो फल कलयुग में भगवान के नाम का कीर्तन मात्र से मिल जाता है।


रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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