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जिस भक्त का अंतःकरण शुद्ध होता है उसे होता है ब्रहम का साक्षात्कार : शंकराचार्य नरेंद्रानन्द सरस्वती

 


गड़वार(बलिया) : क्षेत्र के श्री जंगली बाबा धाम पर चल रहे महारुद्र यज्ञ के अवसर पर पधारे काशी सुमेरूपीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानन्द सरस्वती ने बुधवार की देर शाम को अपने आशीर्वचन के प्रथम दिन कहा कि भारत वर्ष अनादि काल से ऋषियों व संत महात्माओं की भूमि रही है।भारत भूमि यज्ञ भूमि थी जहाँ के ऋषि मुनि अपने साधना तपस्या के बल पर असम्भव कार्य को भी सम्भव किए।कहा कि विश्व पटल पर अशांति का वातावरण उतपन्न हो रहा है।इसमें समय चक्र का भी प्रभाव है।इससे बचने का एकमात्र उपाय भगवत स्मरण है।जिसका मन ईश्वर में समर्पित भाव से रहेगा उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा।कहा कि देवताओं के अधीन विश्व ब्रह्मांड की सृष्टि है और वेद की ऋचाएं उनको प्रसन्न करने के लिए रिमोट कंट्रोल है।ज्ञान,वैराग्य रूपी नेत्रों से देवता का दर्शन हो सकता है।जिस भक्त का अंतःकरण शुद्ध होता है उसे ब्रहम का साक्षात्कार होता है।कहा कि गीता व मानस के निरंतर स्वाध्याय से भारत कभी भी गुलाम नहीं हो सकता है।प्रत्येक घर में गीता व मानस का स्वाध्याय करने से घर में भी सुख शांति बनी रहती है।कहा कि जहां धर्म होता है वहां विजय निश्चित होती है।यज्ञ साक्षात भगवान शिव का रूप है।यज्ञ में श्रद्धा और भक्ति भाव से आहुति देने से सभी कामनाओं की प्राप्ति होती है।आशीर्वचन के पूर्व स्वामी श्री परमेश्वरानन्द सरस्वती(उड़िया बाबा) सहित पंडाल में मौजूद सभी संत जन व भक्तों ने शंकराचार्य को माला पहनाकर अभिवादन किये।वहीं इस दौरान बिहार के हथुआ स्टेट के राजा बहादुर मृगेंद्र प्रताप शाही ने भी सपरिवार श्री जंगली बाबा के मंदिर पर पहुंच कर दर्शन पूजन किए।उन्होंने शंकराचार्य नरेंद्रानन्द सरस्वती जी व स्वामी परमेश्वरानन्द सरस्वती जी(उड़िया बाबा)का भी दर्शन कर आशीर्वाद लिया।वहीं गुरुवार को धनतेरस के दिन श्री जंगली बाबा के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर क्षेत्र के श्रद्धालु भक्तों ने बाबा श्री का दर्शन पूजन किया।इस मौके पर नाल बाबा, चमचम बाबा,सियाराम रसिक,सत्यनारायण दास,रामेश्वर दास,आचार्य छोटेलाल उपाध्याय, आचार्य अजय ओझा,आचार्य पंडित राहुल उपाध्याय,पुजारी सुरेश उपाध्याय,सौरभ कुमार,घनश्याम सिंह,लल्लन गुप्ता,मुन्ना सिंह,अशोक गुप्ता, राजू गुप्ता, मोहन साहू,प्रदीप सिंह,नथुनी सिंह,झूलन भईया आदि लोग उपस्थित रहे।संचालन भोला प्रसाद आग्नेय ने किया।




पीयूष श्रीवास्तव

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