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पाच वर्षों बाद भी पूर्ण आकार नहीं ले सका चिकित्सक भवन, बाउंड्रीवाल न होने दुश्वारियां

 


रसड़ा (बलिया)  उत्तर प्रदेश सरकार सबका साथ सबका विकास के तहत पढाई लिखाई दवाई पर पानी की तरह पैसा बहा रही हैं मगर हुजूर बलिया जिले के रसड़ा सीएचसी के चिकित्सकों की आवास की समस्या के सामधान हेतु सीएचसी के समीप ही विगत पांच वर्षों से बनाया जा रहा चिकित्सक आवास के निर्माण कच्छप गति से कराये जाने से चिकित्सकों सहित आमजन में रोष व्याप्त होता जा रहा है। वैसे तो इस चिकित्सा आवास में शेष ही कार्य अवशेष रह गए हैं किंतु उसे कब तक पूर्ण कर विभाग को आेवर हैंड किया जायेगा यह बताने को कोई तैयार नहीं है। सबसे आश्चर्य जनक पहलू तो यह कि इसके चारों आेर चाहरदिवारी निर्माण न कराये जाने से चिकित्सकों की सुरक्षा सहित अन्य समस्याएं और भी दुश्वारयां बढेंगी। इस चिकित्सक आवास का निर्माण सपा के कार्यकाल से ही शुरू हुआ किंतु अब तक पूर्ण रूप नहीं ले पाया है। बताते चलें कि कई वर्षों से चिकित्सक आवास न होने के कारण यहां चिकित्सक तैनाती नहीं कराना चाहते हैं किंतु सपा कार्यकाल में जब चिकित्सक आवास बनना शुरू हुआ तो आमजनों सहित कार्यरत चिकित्सकों में एक आशा की किरण दिखाई दिया कि चिकित्सक आवास के बन जाने मरीजों को आसानी से इलाज संभव हो सकेगा किंतु पांच साल बाद भी इस भवन का सम्पूर्ण कार्य अभी तक नहीं होने से कार्यदायी संस्था पर कई सवालिया निशान उठने लगे हैं।  सबसे बड़ा सवाल यह कि यह चिकित्सक भवन कब पूर्ण होकर विभाग को सौंपा जायेगा ताकि चिकित्सक को अपना आवास मिल सके।

इस सबंध मे तीन महिने के नवागत अधिक्षक पीसी भारती से जानने की कोशिश किया तो उन्होंने यह कहते हुए गेद मुख्य चिकित्सा अधिकारी बलिया के पाला मे डाल दिया कि हमे उपर से निर्देश है आप बाइट नहीं देना है।चूकि संवाददाता ने पीसी भारती से कहा सर आपही लोगों के लिए यह खबर है मगर उन्होंने कहा हम कैमरे पर नहीं बोल सकतें उन्होंने बताया कि कोई डाक्टर रुम ऐलाट नहीं कराना चाहता है चूकि बाउंड्री नहीं है ।

हालांकि सरकार के निर्देश मे कागजों पर काफी स्टाफ है मगर हुजूर के पास कहा देखें कि धरातल पर कितने डाक्टर उपस्थित है ।

जानकारी के मुताबिक सभी डाक्टर नगरपालिका क्षेत्र में प्राइवेट रुम ले रखें है। बाकी कागजों में ही चल रहें है ।

जरूरत है ऐसे मे उच्च अधिकारियों का अचानक निरीक्षण और गैर हाजिर डाक्टरों के ऊपर कार्यवाही ।



रिपोर्ट पिन्टू सिंह 



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