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गुरु को भगवान से बड़ा स्थान दिया गया है गुरु के बिना स्वस्थ समाज की स्थापना नहीं हो सकती : पूर्व प्रमुख कन्हैया सिंह

 


बैरिया(बलिया) सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के अनुज पूर्व ब्लाक प्रमुख कन्हैया सिंह ने कहा कि गुरु को भगवान से बड़ा स्थान दिया गया है गुरु के बिना स्वस्थ समाज की स्थापना नहीं हो सकती ।

 उल्लेखनीय है कि ब्लॉक संसाधन केंद्र मुरली छपरा पर गुरुवार को आयोजित प्रेरणा ज्ञानोत्सव कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा अपने उद्देश्यों से भटक गई है इसे पटरी पर लाने के लिए हम सबको आगे आकर इसे पहल करनी होगी जो संस्कार प्राथमिक विद्यालयों में मिल सकता है वह प्राइवेट विद्यालय में कभी नहीं मिल सकता।

विशिष्ट अतिथि तहसीलदार बैरिया शिवसागर दुबे ने कहा कि शिक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन बखूबी करें लोगों ने विश्वास मे लगाएं प्राथमिक विद्यालयों के प्रति लोगों का विश्वास बढ़े आने वाले दिनों में  प्राइवेट विद्यालय में ताला लग जाएंगे ।



खंड शिक्षा अधिकारी अवधेश कुमार राय ने प्रेरणा ज्ञानोत्सव पर विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए बताया की कोरोना काल में आए शैक्षणिक गैप को दूर करने के लिए इस कार्यक्रम को शुरू किया गया है। उम्मीद है की गुरुजनों छात्रों व अभिभावकों के सहयोग से यह गैप दूर कर लिया जाए। उन्होंने बेसिक शिक्षा के  कार्यक्रमों नियमों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए सबका सहयोग मांगा सर्वप्रथम मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

इस अवसर पर श्याम सुंदर उपाध्याय राम प्रकाश सिंह परमेश्वर गिरी राधेश्याम पांडे नीरज सिंह सुनील सिंह राज नारायण सिंह प्रधान रामाशंकर सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे ।

अध्यक्षता परमात्मा सिंह व संचालन अजय तिवारी ने किया ईश्वर दयाल पांडे और संचालन सुनील सिंह ने किया। 



 प्रेरणा ज्ञानोत्सव कार्यक्रम में श्याम सुंदर उपाध्याय खंड शिक्षा अधिकारी से मांग किया कि शिक्षा क्षेत्र मुरली छपरा व बैरिया में कुछ सेटिंग टीचर है जो खंड शिक्षा अधिकारी व प्रधान से सेटिंग करके रहते तो है अन्य जगह किंतु हस्ताक्षर उनका विद्यालय में बनता है इस पर ध्यान देने की जरूरत है ऐसे अध्यापकों को अगर संभव हो तो उन लोगों को वहीं पर स्थानांतरण कर दिया जाए जहां उनको सुविधानुसार ड्यूटी कर सके जिस पर खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि अब चेकिंग ऑनलाइन होती है इसमें किसी के साथ सहूलियत की कोई गुंजाइश नहीं है अगर कोई इस तरह का अध्यापक है तो अपनी कार्यशैली बदल ले।


वी चौबे

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