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महिला सशक्तीकरण एक विवेकपूर्ण प्रक्रिया है : श्रवण कुमार पांडेय



रिपोर्ट : धीरज सिंह


बलिया। आज सबसे ज्यादा महिला सशक्तिकरण की बाते हो रही है। लेकिन महिला सशक्तीकरण क्या है यह कोई नहीं जानता। महिला सशक्तीकरण एक विवेकपूर्ण प्रक्रिया है। हमने अति महत्वाकांक्षा को सशक्तिकरण मान लिया है। मुझे लगता है महिला दिवस का औचित्य तब तक प्रमाणित नहीं होता, जब तक कि सच्चे अर्थों में महिलाओं की दशा नहीं सुधरती। यह बाते पत्रकार श्रवण कुमार पांडेय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही।

कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि महिला दिवस का आयोजन सिर्फ रस्म अदायगी भर नहीं रह जाए। वैसे यह शुभ संकेत है कि महिलाओं में अधिकारों के प्रति समझ विकसित हुई है। अपनी शक्ति को स्वयं समझकर, जागृति आने से ही महिला घरेलू अत्याचारों से निजात पा सकती है। कामकाजी महिलाएं अपने उत्पीड़न से छुटकारा पा सकती हैं तभी महिला दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी। कहा कि महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में अपने आप को स्थापित कर लोह‌ा मनवाने का काम किया है। चाहे वह राजनीति हो, खेल हो, शिक्षा हो या देश की रक्षा की बात हो, हर जगह महिलाओं ने परचम लहराने का काम किया है। जिसका नतीजा है कि सरकार ने भी हर क्षेत्र में महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं चला रही है। यह देखा जाना चाहिए कि क्या उन्हें उनके अधिकार प्राप्त हो रहे हैं। वास्तविक सशक्तीकरण तो तभी होगा, जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होंगी और उनमें कुछ करने का आत्मविश्वास जागेगा।

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