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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मे आरक्षण व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट के फैसले से एकबार फिर कयासबाजियों का बाजार गर्म

 


मनियर, बलिया । त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मे आरक्षण व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट के दिये गये महत्व पूर्ण फैसले के बाद क्षेत्र के राजनैतिक गलियारे मे एकबार फिर कायासबाजियो का दौर दिन भर गर्म रहा । जगह जगह पर स्थिती की समीक्षा करते व अपनी अपनी राय देते देखे गये फैसले के बाद जहां एक ओर कुछ चेहरो पर अनिश्चिताओ के लाल मडराते दिखे वही कुछ के लिए कोर्ट  का फैसला मन के आशा की किरण दे दिया ।गौरतलब हो कि कोर्ट ने आरक्षण को अपने फैसले मे 2015 को आधार  मानते हुए चुनाव कराने का आदेश दिया है विदीत हो कि  पूर्व आरक्षण के अवुसार कुछ दिनो पूर्व ब्लाक मुख्यालयो पर आरक्षण  की सुची चस्पा भी कर दी गयी थी उक्त आरक्षण के अनुरूप कुछ सिट अन्य वर्ग के खाते मे आरक्षित हो जाने के कारण अगली बारी के लिए इन्तजार करने के लिए विवस हो गये वही दुसरी ओर सीटो के निर्धारण स्थिती को अपने पक्ष मे देखते हुए कुछ लोगो ने चुनावी विगुल फुक कर जनसम्पर्क अभियान से लेकर जागरूक कार्यकर्ताओ संग बैठको व मन्त्रणाओ का दौर चालु भी कर दिया था वही शोसल मिडीया से लेकर चट्टी चौराहे पर होडिगं व पोस्टर की भरमार भी दिखायी देने लगी जनता का आशिर्बाद लेकर अपनी विजय पताका सुनिश्चित करने के लिए तनमन धन से चुनावी दंगल मे उतर चुके एैसे दावेदार अब खुद को उहा पोह कि स्थिती मे महसुस कर रहे है  परन्तु तस्वीर का पहलू एक यह  भी है कि एैसे चेहरे जो आम जनता के बीच अंगद की भाँति अपना पावं जमाचुके है अब उनके लिए पांव पिछे लेना मुश्किल जान पड़ रहा है इन्हे ये डर सताने लगा है कि कही चुनावी अभियान को रोका गया तो अपने वोटरो के बीच कोई भ्रम की स्थिती न उत्पन्न हो जाय इसलिए समय की नजाकत को भाँपते हुए ये खरगोश की बजाय कछुए की चाल से ही सही अपना चुनावी अभियान आगे बढाने की दलील दिये सुने जा रहे है।



राममिलन तिवारी

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