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जाने कैसे हुआ जलकुंभी के फल का चमत्कार और ठीक हो गई कैंसर जैसी असाध्य बीमारी

 





बलिया: यह चमत्कार हीं तो है, नहीं तो जिस कमला पांडे को मेडिकल सांइस और डाक्टरों ने कुछ दिन का मेहमान बताया था, वह  कैंसर से मुक्त नहीं हो पाती. लेकिन यह सब कुछ हुआ पकड़ी धाम स्थित माँ काली की कृपा से. इस चमत्कार को फलीभूत करने में पकड़ी धाम के पुजारी और माँ काली के अनन्य भक्त रामबदन भगत की भी बड़ी भूमिका रही. जिनके प्रयास से कमला स्वस्थ हो सकी.





अपनी पीड़ा को शब्दों में बयां करतें हुए बिहार के आरा जिला के रघुनाथपुर गाँव निवासी कमला पांडे के पुत्र प्रेम कुमार पांडे बताते है कि उनकी माँ को कैंसर की शिकायत हुई. स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराने के बाद भी जब कोई राहत नहीं मिलीं तो आरा के जिला अस्पताल में उपचार कराया गया, जहाँ डाक्टरों ने पटना ले जाने की बात कही. बताते है कि इसके बाद वह माँ को लेकर पटना गए, जहाँ डाक्टरों ने 21 बार डाक्टरों ने किमो थेरेपी से  कैंसर का इलाज किया, लेकिन बीमारी नहीं रुकीं.  बाद में डॉक्टरों ने कहा कि यह बीमारी अब ठीक नहीं होगी और  तुम्हारी माँ का जीवन कुछ दिन और शेष है. बताते है कि इसके बाद तो मानो उसके होश उड़ गए. लेकिन इसी दौरान  किसी ने  उन्हें पकड़ी धाम की काली मां के मंदिर में जाने की नसीहत दी. फिर वह माँ को लेकर पकड़ी धाम स्थित काली मंदिर पहुंचे और मंदिर के पुजारी रामबदन भगत से अपनी व्यथा बताई.

मां काली के अनन्य उपासक रामबदन भगत ने पहले उन्हें मां का प्रसाद दिया और  फिर  कैंसर के उपचार के लिए जलकुंभी के 100 से 150 फलों को सिलबट्टे पर पीस कर माँ को पिलाने को कहा.  इसके बाद प्रेम करीब 3 माह तक अपनी माँ को  जलकुंभी के फल को पीसकर पिलाते रहे.

परिणाम स्वरूप जिस कमला पांडे को डॉक्टरों ने यह कह कर लौटा दिया था कि अब वह महज 2 से 3 माह की मेहमान है, वह अब भला चंगा होकर घूम रही है. प्रेम बताते हैं कि उनकी माँ के लिए तो जलकुंभी का फल अमृत समान है. वह दूसरे कैंसर पीड़ित रोगियों को भी जलकुंभी के फल के सेवन की सलाह देते हैं.



डेस्क







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