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आचरण, नियम व कर्म की महत्ता है कलियुग में-स्वामी हरिहरानंद जी

 

गड़वार(बलिया):आचरण, नियत एवं कर्म की महत्ता कलियुग में काफी बढ़ गई है।मानव का स्प्ष्ट एवं सकारात्मक होना चाहिए।उक्त बातें क्षेत्र के घोसवती गांव में पूज्य संत स्वामी हरिहरानंद ने उपस्थित श्रोतागणों से अपने प्रवचन के दौरान कहा।



कहा कि सुख की अनुभूति कठिनाई के बाद ही होती है।जैसे तपस्या का फल कठिन तप करने के बाद ही प्राप्त होता है।प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम ढाई घण्टे भगवत भजन करना चाहिए।कहा कि यदि व्यक्ति चार बातों भौतिक सुखों का त्याग,मांस-मदिरा का परित्याग, सप्ताह में एक दिन का उपवास व नियमित रूप से शारीरिक श्रम करने तथा टहलने पर अमल करें तो उन्हें कोई भी बीमारी या शारीरिक मानसिक परेशानी नहीं होगी। परिश्रम से भोग की शक्ति बढ़ती है। इस अवसर पर अजय तिवारी,चंदन तिवारी, अनुज मिश्रा, लल्लन दुबे, चंदन तिवारी, वीरेंद्र, अमरनाथ, कन्हैया उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।




रिपोर्ट पीयूष श्रीवास्तव

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