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अपने आराध्य की आराधना ही मंगलाचरण:-जीयर स्वामी




दुबहर । क्षेत्र में हो रहे चातुर्मास व्रत यज्ञ के दौरान बुधवार की देर शाम श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा को सुनाते हुए संत लक्ष्मी प्रपन्न जियर स्वामी जी महाराज ने कहा कि हम लोग अपने दैनिक कार्यों में जो कुछ भी सही गलत हमसे जाने अनजाने में हो जाता है उसके मार्जन के लिए हमें यज्ञ तप साधना का आयोजन करना चाहिए । जिससे हमारे पाप कुछ कम हो सके और हम आगे किसी प्रकार के गलत कार्यों को करने से बचें यह प्रेरणा हमें यज्ञ तप उपासना से मिलती है । इसीलिए यज्ञ आदि का आयोजन होता है उन्होंने श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि नैमिषारण्य की धरती पर सूत जी महाराज ने 88 हजार ऋषि मुनियों को कथा सुनाने से पूर्व मंगलाचरण से कथा का आरंभ किया । अपने आराध्य की आराधना ही मंगलाचरण होती है कहा कि भागवत महापुराण की कथा को बार बार सुनने से मन, बुद्धि ,दिमाग सदमार्ग पर चलने लगते हैं।  और ना चाहते हुए भी बार-बार अच्छे कर्म करते रहने से मन अच्छे कर्मों में रत हो जाता है।  जिससे मनुष्य का कल्याण हो जाता हैं । कहा की जिस को पकड़ने मानने समझने और करने से मनुष्य गिरने से बच जाए वही धर्म है। धर्म को पकड़ने से मनुष्य गिरने भटकने से रुक जाता है । यज्ञ में जीयर स्वामी के दर्शन के लिए दूर दूर से लोग पहुँच रहे हैं ।

रिपोर्ट:-नितेश पाठक

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