Breaking News

Akhand Bharat

ज्ञान एवं भक्ति का अक्षय भंडार है श्रीमद्भागवत महापुराण:- लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी



दुबहड़। समाज में उपकार करने वाला व्यक्ति सर्वश्रेष्ठ होता है। श्रीमद्भागवत रूपी दिव्य ज्ञान का   रसपान कभी भी किया जा सकता हैं। धर्म ,भगवान एवं श्रीमद्भागवत में साक्षात स्थापित है। उक्त उद्गार श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी महाराज ने भृगु क्षेत्र में जनेश्वर मिश्रा सेतु एप्रोच मार्ग के निकट हो रहे चतुर्मास यज्ञ में गुरुवार की देर शाम प्रवचन के दौरान व्यक्त किया। कहा कि जहां भगवान के भक्त होते हैं वहां स्वाभाविक रूप से भगवान का वास होता है। इस धरा धाम पर जब जब भी धर्म का क्षय होने लगता है, पाप बढ़ने लगते हैं। तब तब धर्म की स्थापना के लिए किसी न किसी रूप में भगवान का प्राकट्य होता है। मुख्य रूप से भगवान साधु, सज्जन एवं महात्माओं के उद्धार व भक्तों को कृतार्थ करने के लिए धरा धाम पर अवतरित होते हैं। 

श्रीमद्भागवत महापुराण विद्या का अक्षय भण्डार है। यह पुराण सभी प्रकार से कल्याण करने वाला तथा दैहिक, दैविक एवं भौतिक तापो का निवारण करता है। श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का महान ग्रन्थ है। जिस घर में नित्य भागवत कथा का पाठ होता है। वह घर तीर्थरूपी हो जाता है।भागवत कथा श्रवण करने से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होकर शांति व मुक्ति मिलती है। श्रीमदभागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है।

रिपोर्ट:-नितेश पाठक

No comments