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विप्रो की हत्या ,दूसरो को धोखा , गौ हत्या , मदिरापान करने वाला महापापी :- जीयर स्वामी




दुबहर :- भारत के महान मनीषी संत त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने जनेश्वर मिश्रा सेतु एप्रोच मार्ग के निकट हो रहे चातुर्मास व्रत में अपने प्रवचन के दौरान एक प्रसंग पर चर्चा करते हुए बतलाया की कलयुग  सिर्फ दान पर टिका है। भागवत में इसकी चर्चा मिलती है। भगवान श्री कृष्ण के नित्यधाम जाते ही कलियुग का आगमन पृथ्वी पर हो गया। राजा परीक्षित ने कलि को सशरीर पकड़ लिया।वह चांडाल वेष में गाय और बैल को पैर से मारते हुये ले जा रहा था। राजा परीक्षित ने वृषभ रूपी धर्म से पूछा कि तुम्हारे तीन पैर किसने तोडे। वृषभ ने कहा मैं धर्म हूं। मेरे चार पैर सत्य, तप, दया और दान हैं। सतयुग में धर्म के चारों पैर सुरक्षित थे। त्रेतायुग में सत्य कमजोर हो जाने से एक पैर टूट गया। द्वापर में सत्य और तप दोनों कमजोर हो जाने से दुसरा पैर टूट जाता है।  कलियुग में सत्य, तप और दया तीनों कमजोर हो जाने से तीनों पैर टूट गए हैं। अर्थात इन तीनों की गरिमा नहीं रह जाती है। चारों तरफ छल, कपट, कलह, अनीति, अन्याय और अधर्म का बोलबाला हो जाता है। इस गुढ रहस्य की चर्चा करते हुए स्वामी जी ने बताया कि  कलियुग में धर्म  सिर्फ दान के बल पर टीका हुआ है। दान के माध्यम से ही लोगों का कल्याण हो सकता है। उन्होंने कहा जिस तरह धर्म के चार पुत्र हैं। उसी तरह अधर्म के चार पुत्र हैं -  लोभ , अनीति, कलह  , दम्भ । यह चारों कलि के प्रभाव से धीरे-धीरे बलवान होते जाते हैं। इनके प्रभाव में जो आएगा। उसका धर्म भ्रष्ट होना तय है।

स्वामी जी ने बतलाया की जो सदाचारी विप्रों इत्यादि की हत्या करता है,उसको धोखा देता है, उससे कपट करता है। उसको महापापी कहा गया है। दुसरा महापापी है गोघाती जो गाय को कसाई के यहा बेचता है।वह भी महापापी है। तीसरा है विश्वासघाती रात दिन मैत्री है थोड़ी सी बात में अपने मित्र से परिवार से विश्वासघात कर दिया उसे भी महापापी कहा गया है। मद्यसेवी यानी शराब पीने वाला व्यक्ति भी महापापी होता है।


रिपोर्ट:- नितेश पाठक

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