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नदी का जलस्तर स्थिर फिर भी तबाही का मंजर बरकरार

   



 मनियर बलिया ।  खतरा बिन्दु से ऊपर बह रही घाघरा नदी का जलस्तर भले ही स्थिर है। फिर भी घाघरा से सटे तटवर्ती इलाकों में तबाहीयो  का मंजर बरकरार  है। आलम यह है कि  घाघरा के बढ़ते जलस्तर से मनियर कस्बा के बहेरा पार, बड़ी बाजार, उत्तर टोला, छोटकी पटखौली, देवापुर में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पटखौली पूरब, संगापुर, पश्चिम पटखौली, दियारा टुकड़ा नं 1 व 2, ऐलासगढ़, मलाहटोलिया, बहदूरा, पिलूई, सोनूपार रीगवन छावनी  सहित दर्जनों गांवों में पानी घरों में घुस गया है। आलम यह है कि अभी सरकारी सहायता के नाम पर कोई भी अधिकारी कर्मचारी इन गांवों का सुध तक लेने नहीं पहुंचा। वहीं किसानों  बाढ़ के पानी से सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूब गई है।

जिम्मेदार अपनी ड्यूटी का निर्वहन केवल कागजों में सिमट कर रह गया है। मनियर सिकन्दरपुर मार्ग से सटे गावों के  परिवार का घर बाढ़ से डूबे 4-5 दिन हो गए। लेकिन आज तक क्षेत्रीय लेखपाल बाढ़ पिड़ितों का सुध तक लेने नहीं पहुंचे । स्थानीय खेदन राजभर, रामदयाल, दुखहरन, दीनदयाल, सीताराम, रघुबीर से बाढ़ सम्बंधित सहायता पर बात की गई तो अपने लेखपालो  को कोसते नजर आए। इस संबंध में लेखपाल ईश्वर दयाल यादव से बात की तो पहले उन्होंने बाढ़ से अनभिज्ञता जताई। फिर बोले कि ठीक है उसको मैं मौके पर जाकर देख लेता हूं।



बाढ़ के पानी से ट्रांसफार्मर जलमग्न


कस्बा स्थित उत्तर टोला में ट्रांसफार्मर के पास बाढ़ का पानी पूरी तरह जलमग्न हो गया है। जिससे तीन दिनों से विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई है। विद्युत आपूर्ति बंद होने कारण करीब 5 हजार की आबादी प्रभावित होने के कारण अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। इन मुहल्ले में बिजली न मिलने के कारण मोबाईल भी बंद है। वहीं पानी अत्यधिक होने के कारण तरह तरह बिषैले जन्तुओं की भरमार हो गई है। बाढ़ क्षेत्रों में नाव चलाने का आलम यह है कि कहीं नाव पर ओवरलोड होकर नाव में बैठकर अपने अपने  गंतव्य तक आ जा रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ नाविक अपनी नाव कागज में लगवार एकांत जगह आराम फरमाते नजर आ रहे हैं।


 प्रदीप कुमार तिवारी

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