दो वर्षीय मासूम बुधिया की मौत ने खोल सिस्टम की पोल, सदमे में परिवार
बलिया : दो वर्षीय मासूम बुधिया की मौत ने खोल सिस्टम की पोल, सदमे में परिवार। मासूम बुधिया की स्कूल वाहन से कुचलकर हुई मौत के बाद परिवार पर दुखो का पहाड़ टूट पड़ा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दो वर्षीय बुधिया सड़क की पटरी पर खड़ी थी तभी स्कूली बच्चों को लेने जा रहे तेज रफ्तार बोलेरो ने शुक्रवार की सुबह उसे कुचल दिया जिससे उसकी मौत हो गई हालांकि ग्रामीणों ने चालक को पकड़ा पीटा और पुलिस को सौंपा किन्तु इससे न तो पीड़ित परिवार का दुख कम हुआ ना ही भविष्य में इस तरह की होने वाली घटनाओ को रोक लगाने के लिए कोई कार्यवाई हुई।
गरीबी रेखा के नीचे भरण पोषण करने वाले आल्हा पासवान दूसरी संतान थी बुधिया उससे दो वर्ष बड़ा उसका भाई अमित है जो इस दुर्घटना में बाल बाल बच गया। मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करने वाले आल्हा पासवान ने बताया कि उसकी बेटी उसके लिए जिंदगी थे उसकी दर्दनाक मौत ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। स्कूल वाहन चालक आये दिन तेज रफ्तार से आते है ओवरलोड बच्चों को भरते है और तेज रफ्तार से स्कूल चले जाते है। इससे सड़क पर चलने वाले लोगों के साथ साथ वाहनों में बैठने वाले बच्चों को भी खतरा है । सरकार को इसपर रोक लगाना चाहिए। माँ का रोते रोते बुरा हाल है बार-बार बेसुध हो जा रही है उसकी चीत्कार सुनकर जो भी वहाँ जा रहा है उसकी आंखें नम हो जा रही हैं। माँ ने रोते हुए बताया कि उनकी बेटी उनके घर की लक्ष्मी थी जब से उसका जन्म हुआ था गृहस्थी की गाड़ी बड़े आराम से चल रही थी कोई परेशानी नही थी किन्तु हत्यारों ने मेरी बेटी की जान ले ली । माँ ने कहा कि मेरी बेटी स्कूल वाहन से कुचल कर मरी अब दूसरी कोई बेटी स्कूल वाहन से कुचल कर ना मरे इसके लिए प्रशासन को कार्यवाई करनी चाहिए। नारायणगढ़ गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्कूल वाहन चालक बहुत तेज रफ्तार में वाहन चलाते है वाहनों में स्कूली बच्चों को ठूस ठूसकर बैठाते है अविभावक एतराज नही करते है और सरकार कार्यवाई नही करती हैं। स्कूल वहां चालको के संदर्भ में शासन के मंसा के विपरीत काम हो रहा है ना तो कोई रोकने वाला है ना तो कोई टोकने वाला है। ऐसे में कोई और बुधिया स्कूल वहां से कुचलकर ना मारे इसके लिए ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक वह जिलाधिकारी से उचित कार्यवाही की मांग की है।
By- Dhiraj Singh


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