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श्री मद्भागवत कथा मात्र पुराण नहीं, बल्कि जीवन की दिशा और दृष्टि है : बालक दास




गड़वार(बलिया) क्षेत्र के करमपुर गांव में चल रहे श्रीमद भगवद्गीता गीता ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन शुक्रवार को कथावाचक बालक दास जी महाराज ने बताया कि किस प्रकार धर्मनिष्ठ और प्रजापालक राजा परीक्षित ने क्रोधवश शमीक ऋषि के गले मृत सर्प डाल दिया। इस घटना के बाद ऋषि पुत्र श्रृंगी ने उन्हें सात दिन में तक्षक नाग के काटने का श्राप दे दिया। कथावाचक ने कहा कि यही श्राप आगे चलकर राजा परीक्षित के मोक्ष का कारण बना और भागवत कथा श्रवण का आधार बना। कथा के दौरान शुकदेव जी महाराज के प्रादुर्भाव का वर्णन हुआ। कथा में भगवान कपिलदेव द्वारा माता देवहुति को दिया गया उपदेश सुनाया गया। इसमें आत्मा और प्रकृति के भेद,मोह-माया से मुक्ति और योगाभ्यास का महत्व बताया गया। कथा के अंत में देवी सती का प्रसंग सुनाया गया,जिन्होंने अपने पिता दक्ष प्रजापति द्वारा भगवान शिव का अपमान सहन न कर योगाग्नि में आत्माहुति दी। उन्होंने कहा कि यह कथा नारी के आत्मबल,अस्मिता और पति-भक्त का जीवंत उदाहरण है। बताया कि श्रीमद्भागवत मात्र पुराण नही,बल्कि जीवन की दिशा और दृष्टि है। जीवन के अंतिम यात्रा में भक्ति,वैराग्य और ज्ञान ही साथ चलते है। वहीं विद्वान आचार्यगणों द्वारा पंचाग पूजन,अरणी मंथन किया गया। यज्ञाचार्य अनामानंद जी महाराज ने बताया कि गीता ज्ञान यज्ञ सप्ताह कथा जन कल्याण और विश्व शांति के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कथा श्रवण करने वालों में विपुल पाठक,शुभम तिवारी,ओम जी तिवारी सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल रहे।


रिपोर्ट : डी.पाण्डेय

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