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अद्वितीय शौर्य, पराक्रम और राष्ट्र भक्ति के प्रतीक महाराजा सुहेलदेव को विजय दिवस के रूप में किया गया याद




गड़वार(बलिया) क्षेत्र के अरईपुर(कोठियां) स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में बुधवार को राजभर एकता समिति के तत्वाधान में महाराजा सुहेलदेव विजय दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारियों,कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लिया। इस दौरान महाराजा सुहेलदेव के शौर्य,त्याग और राष्ट्ररक्षा में उनके योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व सेक्टर प्रभारी रामप्रवेश राजभर ने किया। उपस्थित लोगों ने महाराजा सुहेलदेव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लिया। राम प्रवेश राजभर ने अपने संबोधन में कहा कि महाराज सुहेलदेव भारतीय इतिहास के ऐसे महानायक है, जिनकी वीरता,साहस और राष्ट्रभक्ति भी समाज को प्रेरणा देती है। यह ऐतिहासिक दिन 11वीं सदी(1034 ई.) में बहराइच की लड़ाई में विदेशी आक्रमणकारी सैयद सालार मसूद(गाजी मियां) पर श्रावस्ती नरेश महाराज सुहेलदेव जी की ऐतिहासिक विजय की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा निर्माण के लिए लोगों से आह्वान किया। पूर्व प्रधान हरिहर गोंड ने महाराजा सुहेलदेव के जीवन को स्वाभिमान,संघर्ष और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का प्रतीक बताया। पूर्व प्रधान हर्षनाथ राजभर ने महाराजा सुहेलदेव को सामाजिक न्याय और जनहित का प्रतीक बताया। उन्होंने उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि  राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के आह्वान पर सभी लोग आज अपने-अपने घरों में महाराजा सुहेलदेव जी के विजय दिवस के अवसर पर दस दीपक अवश्य जलाएं। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबूराम राजभर व संचालन अखिलेश ने किया। इस अवसर पर प्रधान गंगासागर,डा.राजेन्द्र राम,अशोक राजभर,सुरेश राजभर,भुवाल राजभर,कार्तिक राजभर,विनोद राजभर,राम अवतार शर्मा,सिंहासन राजभर सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।


रिपोर्ट : डी.पाण्डेय

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