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सत्संग के बिना वैराग्य और भक्ति संभव नहीं : बालक दास

 



गड़वार (बलिया)  क्षेत्र के करमपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन की शुक्रवार की रात कथा वाचक बालक दास जी महाराज ने ज्ञान वैराग्य भक्ति की कथा का श्रवण कराया। कथा वाचक ने बताया बिना कथा सत्संग के ज्ञान वैराग्य भक्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती है। कथा में आगे धुंधकारी-गोकर्ण की अद्भुत कथा का भी श्रवण कराया।

कथा के दौरान बताया कि भागवत कथा श्रवण करने से घर के पितृदोष की शांति मिलती है। उन्होंने बताया कि आत्म देव पं. महाराज ने पुत्र के लिए जंगल में जाकर मरने का निश्चय किया संत की कृपा से फल प्राप्ति से पुत्र की प्राप्ति हुई।

गोकर्ण महान ज्ञानी हुए धुंधकारी महा दुष्ट हुआ धुंधकारी मरने के बाद प्रेत बन कर सबको दुख देने लगा। भागवत कथा श्रवण करा करके धुंधकारी प्रेत योनि से मुक्ति कराई। धुंधकारी के लिए भगवान के धाम से विमान आया विमान में बैठ करके धुंधकारी की भागवत की महिमा गाते हुए जय-जयकार करते हुए भगवान के धाम में पहुंचे। उन्होंने बताया कि भागवत कथा से प्रेत बाधा की शांति होती है। पितृ दोष की शांति होती है। वहीं काशी से पधारे विद्वान आचार्य गणों द्वारा प्रतिदिन मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार की बीच हवन-पूजन किया जा रहा है। यज्ञ स्थल पर परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ रही है। यज्ञाचार्य अनामानंद जी महाराज ने बताया कि गीता ज्ञान यज्ञ सप्ताह कथा जन कल्याण और विश्व शांति के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कथा श्रवण करने वालों में विपुल पाठक,शुभम तिवारी,ओम जी तिवारी सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल रहे।


रिपोर्ट : डी.पांडेय

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