एमडीएम में 13.71 लाख की अनियमितता, प्रधानाचार्य समेत दो पर एफआईआर
यू-डायस और एमडीएम रजिस्टर में विद्यार्थियों की संख्या में मिला बड़ा अंतर, जांच में कक्षा छह से आठ तक संचालन पर भी उठे सवाल
मनियर (बलिया)। शिक्षा क्षेत्र बांसडीह के इंटर कॉलेज ताजपुर मुड़ियारी में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना में कथित वित्तीय अनियमितता और विद्यार्थियों के फर्जी नामांकन के मामले में पुलिस ने प्रधानाचार्य समेत दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। खंड शिक्षा अधिकारी बांसडीह अनूप कुमार त्रिपाठी की तहरीर पर शनिवार को मनियर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 318(4), 336 और 338 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मनियर थाना प्रभारी अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी की तहरीर के आधार पर इंटर कॉलेज ताजपुर मुड़ियारी के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर पांडेय और जिला समन्वयक एमडीएम कार्यालय से संबद्ध अजीत पाठक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच निरीक्षक/वरिष्ठ निरीक्षक मोहम्मद इस्माइल शेख को सौंपी गई है। जांच में सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कक्षा छह से आठ तक संचालन पर उठे सवाल
जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की दो सदस्यीय टीम ने विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार कक्षा छह, सात और आठ का नियमित भौतिक संचालन नहीं होने के बावजूद एमडीएम योजना में इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को लाभान्वित दर्शाया गया।
जांच के दौरान विद्यालय में कक्षा छह से आठ तक कुल 449 विद्यार्थी बताए गए, जबकि यू-डायस पोर्टल पर दर्ज संख्या काफी कम मिली। रिपोर्ट के अनुसार कक्षा छह में सात, कक्षा सात में 37 और कक्षा आठ में 24 विद्यार्थियों के नामांकन का उल्लेख था। वर्ष 2025-26 के आंकड़ों में भी विद्यार्थियों की संख्या में अंतर पाया गया।
रजिस्टर में सैकड़ों बच्चों को भोजन कराने का दावा
जांच टीम को एमडीएम रजिस्टर में भी कई विसंगतियां मिलीं। जुलाई 2026 में तीन दिनों में 99 और अन्य कार्य दिवसों में 221 विद्यार्थियों की संख्या दर्ज की गई थी। मई में कक्षा छह से आठ तक 272 से 275 विद्यार्थियों को एमडीएम दिए जाने का आंकड़ा दर्ज था। वहीं अगस्त में पांच अगस्त तक रजिस्टर में विद्यार्थियों की संख्या दर्ज नहीं थी, जबकि आईवीआरएस कॉल के जरिये एक, तीन और चार अगस्त को 199 विद्यार्थियों के लाभान्वित होने की जानकारी सामने आई।
जांच के दौरान विद्यालय में एमडीएम बनाने के लिए गैस सिलेंडर, राशन, बर्तन और बच्चों की थालियां आदि भी उपलब्ध नहीं मिलीं। रसोईघर के संचालन में भी कमियां पाई गईं।
13.71 लाख रुपये के भुगतान पर सवाल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में एमडीएम योजना के तहत 7,30,904 रुपये और वर्ष 2025-26 में 6,40,669 रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह संबंधित अवधि में कुल 13,71,573 रुपये का भुगतान हुआ। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कक्षा छह से आठ के विद्यार्थियों को लाभान्वित दिखाकर यह भुगतान कराया गया।
जांच समिति ने प्रधानाचार्य चंद्रशेखर पांडेय और जिला समन्वयक एमडीएम अजीत पाठक को कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार माना है। मुख्य विकास अधिकारी बलिया के 27 अगस्त के आदेश के बाद धनराशि की वसूली, विभागीय कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे।
छात्रों की शिकायत के बाद खुला मामला
बताया गया कि विद्यालय के छात्रों ने जिलाधिकारी को डाक के माध्यम से शिकायत भेजकर विद्यालय में एमडीएम नहीं बनने की जानकारी दी थी। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विकास अधिकारी की दो सदस्यीय जांच टीम गठित की थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार पांच अगस्त को टीम विद्यालय पहुंची तो प्रधानाचार्य ने कक्षा छह से आठ तक के बच्चों की छुट्टी होने की बात कही। हालांकि, छुट्टी किस अधिकारी के आदेश पर दोपहर 12 बजे की गई, इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। कक्षाओं के बाहर भी यह स्पष्ट नहीं था कि कौन सा कमरा किस कक्षा के लिए है। ब्लैकबोर्ड पर भी कोई शैक्षणिक सामग्री नहीं मिली।
उस दिन विद्यालय में एमडीएम भी नहीं बना था और कोई रसोइया मौजूद नहीं था। हालांकि कक्षा नौ से 12 तक की कक्षाएं संचालित मिलीं। अब पुलिस दस्तावेजों, एमडीएम रजिस्टर, यू-डायस और आईवीआरएस रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाएगी कि विद्यार्थियों की संख्या में इतना बड़ा अंतर कैसे हुआ और सरकारी धनराशि के भुगतान में किस स्तर पर अनियमितता हुई।
रिपोर्ट #मनु तिवारी


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