जानें अपना राशिफल
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 08 सितम्बर 2026*
*⛅दिन - मंगलवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - दक्षिणायण*
*⛅ऋतु - शरद*
*⛅मास - भाद्रपद*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - द्वादशी दोपहर 02:42 तक तत्पश्चात् त्रयोदशी*
*⛅नक्षत्र - पुष्य दोपहर 04:39 तक तत्पश्चात् अश्लेशा*
*⛅योग - परिघ मध्यरात्रि 12:40 तक तत्पश्चात् शिव*
*⛅राहुकाल - दोपहर 03:31 से शाम 05:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:11*
*⛅सूर्यास्त - 06:38 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:00 से दोपहर 12:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:02 से मध्यरात्रि 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - भौम प्रदोष व्रत, सर्वार्थसिद्धि योग (शाम 04:39 से प्रातः 06:11 सितम्बर 09 तक)*
*🌥️विशेष - द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🌹महालय श्राद्ध आरम्भ - 7-21 सितम्बर🌹*
*🔹श्राद्ध में रखें ये सावधानियाँ🔹*
*🔸पितरों को खिलाये बिना नहीं खायें । पराया अन्न भी नहीं खाना चाहिए ।*
*🔸श्राद्धकर्ता श्राद्ध पक्ष में पान खाना, तेल-मालिश, स्त्री-सम्भोग, संग्रह आदि न करें ।*
*🔸श्राद्ध का भोक्ता दुबारा भोजन तथा यात्रा आदि न करें । श्राद्ध खाने के बाद परिश्रम और प्रतिग्रह से बचें ।*
*🔸श्राद्ध करनेवाला व्यक्ति ३ से ज्यादा ब्राह्मणों तथा ज्यादा रिश्तेदारों को न बुलायें ।*
*🔸श्राद्ध के दिनों में ब्रह्मचर्य व सत्य का पालन करें और ब्राह्मण भी ब्रह्मचर्य का पालन करके श्राद्ध ग्रहण करने आये ।*
*🔹श्राद्ध में उत्तम क्या ?🔹*
*🔸तीन चीजें श्राद्ध में प्रशंसनीय हैं :*
*(१)शुद्धि*
*(२) अक्रोध*
*(३) अत्वरितता : जल्दबाजी नहीं, धैर्य ।*
*🔸तीन चीजें श्राद्ध में पवित्र होती हैं :*
*(१) तिल*
*(२) बेटी का बेटा दौहित्र*
*(३) कुतपकाल*
*🔸 सुबह 11:36 से लेकर 12:24 तक विशेषकाल माना जाता है । थोड़ा आगे-पीछे हो जाय तो कोई बात नहीं लेकिन इस काल में श्राद्ध की विशेष पवित्रता होती है ।*
*🔸श्राद्धकाल में सात विशेष शुद्धियों का ध्यान रखना चाहिए :*
*(1) नहा-धोकर शरीर शुद्ध हो ।*
*(2) श्राद्ध की द्रव्य-वस्तु शुद्ध हो ।*
*(3) स्त्री शुद्ध हो, मासिक धर्म में न हो ।*
*(4) जहाँ श्राद्ध करते हैं वह भूमि शुद्ध हो । गोझरण से, देशी गाय के गोबर से लीपन की हुई हो ।*
*(5) मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें ।*
*(6) ब्राह्मण भी शुद्ध भाववाला हो और तम्बाकू, जर्दा आदि का सेवन न करता हो ।*
*(7) मन को भी शुद्ध रखें ।*
*- 📖 ऋषि प्रसाद अगस्त 2014*


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