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बीएचयू पहुंची रागिनी, पैरों की नसों की जांच शुरू

 


रिपोर्ट आने के बाद तय होगी इलाज की दिशा, पैर को क्रियाशील बनाने की उम्मीद

मनियर (बलिया)। सोशल मीडिया पर एक पैर के सहारे फुदक-फुदककर स्कूल जाने वाली दिव्यांग बालिका रागिनी की संघर्षपूर्ण कहानी सामने आने के बाद अब उसके बेहतर इलाज की उम्मीदें बढ़ गई हैं। शनिवार को रागिनी के पैरों की नसों की विस्तृत जांच के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. दिग्विजय कुमार स्वयं उसकी मां बबीता देवी और अन्य परिजनों के साथ बीएचयू पहुंचे। चिकित्सकों की देखरेख में रागिनी के पैर की नसों की जांच की जा रही है।

पीएचसी मनियर के प्रभारी डॉ. दिग्विजय कुमार ने बताया कि रागिनी के पैरों की नसों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए उसे बीएचयू लाया गया है। डॉ. शुभम श्रीवास्तव की देखरेख में जांच चल रही है। जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे के उपचार और पैर को क्रियाशील बनाने की दिशा में निर्णय लिया जाएगा।

डीएम के निर्देश पर शुरू हुई थी जांच

दरअसल, जिलाधिकारी बलिया मंगला प्रसाद सिंह स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ दो सितंबर को रागिनी के गांव दिघेड़ा ग्राम पंचायत के रानीपुर पहुंचे थे। उन्होंने रागिनी की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी लेने के बाद उसके पैरों की आवश्यक जांच कराने के निर्देश दिए थे। रागिनी को हायर सेंटर ले जाकर जांच कराने की जिम्मेदारी पीएचसी मनियर के प्रभारी डॉ. दिग्विजय कुमार को सौंपी गई थी।

इसके बाद जिला अस्पताल बलिया में ऑर्थो सर्जन डॉ. करण चौहान और डॉ. अजीत सिंह की टीम ने रागिनी के पैर की जांच की। चिकित्सकों ने पाया कि पैर की नसों की विस्तृत जांच के लिए आवश्यक संसाधन बलिया में उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद उसे नसों की जांच के लिए बीएचयू हायर सेंटर रेफर किया गया।

बचपन के हादसे ने छीन ली पैर की ताकत

सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय के अनुसार, रागिनी के एक पैर के पिछले निचले हिस्से की दो हड्डियां बचपन में हुई दुर्घटना में टूट गई थीं। ये हड्डियां सही तरीके से जुड़ नहीं सकीं। पैर को ठीक करने के लिए तीन बार ऑपरेशन भी किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।

इसके बावजूद रागिनी ने हिम्मत नहीं छोड़ी। वह अब तक एक पैर के सहारे फुदक-फुदककर घर से करीब 400 मीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय पढ़ने जाती रही है। उसकी संघर्षपूर्ण जिंदगी की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो मामला जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार तक पहुंच गया। इसके बाद रागिनी की मदद के लिए कई हाथ आगे आए।

बैटरी वाली साइकिल के लिए भी हुई जांच

रागिनी को आवागमन में सुविधा देने के लिए कानपुर की एलिम्को कंपनी की टीम ने भी उसकी जांच की है। हालांकि, अब उसकी नसों की जांच की रिपोर्ट अहम मानी जा रही है। नसों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही चिकित्सक आगे की उपचार योजना तय करेंगे। इसी के आधार पर यह भी तय होगा कि रागिनी के पैर को किस तरह क्रियाशील बनाया जा सकता है।

सरकार उठाएगी इलाज का खर्च, समाजसेवियों ने भी बढ़ाए हाथ

रागिनी के इलाज का पूरा खर्च प्रदेश सरकार द्वारा उठाए जाने की बात कही गई है। वहीं, कई समाजसेवियों ने उसकी पढ़ाई और इलाज में सहयोग का वादा किया है। इनमें "फिजिक्स वाला" के नाम से चर्चित अलख पांडेय द्वारा 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दिए जाने की चर्चा है।

बीएन इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक एवं सपा नेता नीरज सिंह गुड्डू ने रागिनी की पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने का वादा किया है। रागिनी डॉक्टर बनना चाहती है।

अब रागिनी और उसके परिवार की उम्मीदें बीएचयू की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच के बाद उसके पैर को क्रियाशील बनाने का रास्ता निकलता है तो यह उसके जीवन में नई उम्मीद जगाने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

रिपोर्ट : मनु तिवारी

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