मोदी सरकार-2 का बजट जुमला: राम गोविंद
*सभी मोर्चों पर दिखाएं गए हैं दिवास्वप्न
*किसानों, मजदूरों, दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं
*आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, बैंकों और उद्यमों के लिए कारगर ठोस प्रस्ताव भी नहीं-नेता प्रतिपक्ष
शनिवार को आम बजट को झूठ का पुलिंदा बताते हुए नेता प्रतिपक्ष श्री चौधरी ने कहा कि इस बजट में भी मोदी सरकार ने किसानों, मजदूरों, दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, मजलूमों, महिलाओं और मध्यम वर्ग के लोगों को सिर्फ छला है। इसमें जुमला नीति की तरह ही सभी को ऐसे दिवास्वप्न दिखाएं गए हैं जो कभी भी जमीन पर नहीं उतर सकते हैं। जैसे बजट में किसानों की आय दोगुनी करने की बात तो कही गई है पर इसके लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं पेश की गयी है। इसके लिए जो प्रस्ताव पेश हैं, वह सिर्फ देखने में अच्छे लगने वाले हैं पर इससे किसानों की उम्मीदें पूरी नहीं होती। बजट में युवाओं, बेरोजगारों के लिए भी कोई ठोस प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। इससे बेरोजगारी और बढ़ेगी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि बजट में विदेशों के लिए नर्स और डाक्टर तैयार करने की बात कही गई है, जबकि देश में ही स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह बेहाल हैं। डाक्टरों और नर्सों की भारी कमी है। यह कमी दूर करने के लिए भी बजट में कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने कहा है कि यह सरकार आम लोगों की सरकार नहीं है बल्कि विशेष लोगों की सरकार है और धीरे धीरे उन्हीं कुछ खास लोगों के हाथ में दिया जा रहा है।
कहा कि इस बजट में 150 ट्रेनों को प्राइवेट हाथों में देने की तैयारी है। यह आत्मघाती कदम है। इससे रेल आम लोगों से दूर होती चली जाएगी और गरीबों की यह सवारी भी बस अमीरों के लिए रह जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयकर के मामले में भी मध्यम वर्ग को सिर्फ ठगा है। जैसे उसने एक तरफ राहत के नाम पर टैक्स स्लैब को बढ़ा दिया है, दूसरी तरफ निवेश को लेकर मिलने वाली छूट में एक नया प्रतिबंध जड़ दिया।इससे निवेश हतोत्साहित होगा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बजट में सरकार आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, बैंकों और उद्यमों के लिए कारगर कई ठोस प्रस्ताव नहीं ला पाई। उन्होंने बजट को दिशाहीन बताते हुए कहा कि इसमें रोजगार सृजन का कोई रोडमैप नहीं है। उन्होंने कहा है कि इसकी वजह में शेयर बाजार में भी हाहाकार रहा। इसकी वजह से आज शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बन्द हुआ।
By-Ajit Ojha


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