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साम्राज्यवाद विश्व के लिए खतरा: बब्बन विद्यार्थी




दुबहड़, बलिया। यदि विभिन्न देशों के जनप्रतिनिधि अपने अंदर से विस्तारवाद, अभिमान एवं द्वेष का परित्याग कर दें तो स्वयं परस्पर प्रेम एवं सभी देशों में शांतिपूर्ण वातावरण की स्थापना हो सकती है। उक्त उद्गार मंगल पांडेय विचार मंच के प्रवक्ता, सामाजिक चिंतक एवं गीतकार बब्बन विद्यार्थी ने रविवार को विश्व शांति दिवस की पूर्व संध्या पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान व्यक्त किया। कहा कि इतिहास गवाह है हमारा देश वसुधैव कुटुंबकम की मूल भावना को स्वीकार करता है। यही वसुधैव कुटुंबकम विश्व शांति का मूल मंत्र है।यह पड़ोसी के सुख-दुख में साथ देने के लिए उत्तम संदेश है। प्रत्येक देश का मानव जीवन जीने की कल्पना करता है। आजकल देशों में शांति के लिए हमेशा तीसरा पक्ष अधिक जिम्मेदार है। लेकिन विभिन्न देशों के जनप्रतिनिधि हथियारों की होंड़ एवं विस्तारवादी नीति के लिए एक दूसरे को आपस में लड़ा कर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं। वह अपने धर्म या देश को महान एवं दूसरे को निम्न कह कर परमात्मा को भी कष्ट पहुंचाते हैं। आज विस्तारवादी व्यवस्था विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है। आज आवश्यकता है देशों को अपने अंदर समाहित विस्तारबाद की भावना, अभिमान एवं द्वेष  का परित्याग कर वसुधैव कुटुंबकम की राह पर अग्रसर हों । तभी विश्व में शांति स्थापना हो सकती है।


रिपोर्ट : नितेश पाठक

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