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चिकित्सकीय उपचार पर भारी पड़ी आस्था, मां की कृपा से विवाहिता को हुए दो-दो पुत्र

 




बलिया:  इसे आस्था के साथ-साथ मां की कृपा तो शायद अतिशयोक्ति होगी क्योंकि जब चिकित्सा विज्ञान किसी मर्ज के उपचार में अपने हाथ खड़े कर देता है तो वहां लोगों को एकमात्र आसरा पकड़ी धाम स्थित काली मां का रह जाता है और मां भी उन्हें कभी निराश नहीं करती बल्कि उनकी खाली झोली को मनोकामना और से भर देती हैं. जिसके कारण आज भी मां के दर पर हाजिरी लगाने वालों का तांता लगा रहता है.

यहां हम आपको एक ऐसी की दुखियारी विवाहिता की कहानी बताने जा रहा है, जिसके बारे में मेडिकल साइंस ने निर्णय कर लिया था कि कभी उसकी गोद हरी-भरी नहीं होगी. यानी उसे बच्चा नहीं होगा, लेकिन बलिया जिला के सहतवार थाना क्षेत्र कि उसकी रिश्तेदारी की एक महिला ने उसे पकड़ी धाम का रास्ता क्या बताया. उसकी गोद में आज एक नहीं दो दो बालक खेल रहे हैं.




बलिया जनपद के रसड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत कस्बा की मूल निवासी  किसान और उसकी पत्नी हेमवंती शादी के लंबे समय बाद से बच्चे के लिए तरस रहे थे. हालांकि इस दौरान उन्हें एक बच्ची हुई,  लेकिन वह आबाद नहीं रह सकी. लंबे समय तक पत्नी की गोद सूनी देख कृष्णा ने कई डॉक्टरों से उसका उपचार कराया, लेकिन जहां जाता, वहां उसे निराशा हाथ लगती. चिकित्सकीय परीक्षण देख डॉक्टरों ने कहा कि अब उसे अब इसे बच्चा नहीं हो सकता.अलबत्ता इसका आप ऑपरेशन करा दीजिए. जिससे उसकी पत्नी काफी निराश रहती थी. इसी दौरान सहतवार निवासी उसकी मामी ने पकड़ी धाम स्थित मां काली की महिमा के बारे में बताया और वहां जाने की सलाह दी.

इसके बाद दोनों पति पत्नी मां के दर पर पहुंचे और वहां हाजिरी लगाने के साथ ही अपनी अर्जी मां के दरबार में रखी. साथ ही मां के अनन्य भक्त और मंदिर के पुजारी रामबदन भगत से अपनी व्यथा सुनाई. भगत ने मां का प्रसाद दिया और उन्हें मां से अपनी मर्जी लगाने की बात कही. यह मां की कृपा ही थी कि जिस हेमंती को मेडिकल साइंस ने यह कह कर वापस लौटा दिया था कि अब उसकी गोद में नहीँ भरेंगी. उसी हेमंती को मां की कृपा से दो दो पुत्रों की प्राप्ति हुई. जिसकी खुशी में वह गाजे-बाजे के साथ मां के दर पर पूजा करने आई. 












डेस्क

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