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बलिया जिला प्रशासन के फरमान के विरोध युवाओं ने खोला मोर्चा, ददरी मेला के आयोजन के लिए चलाया हस्ताक्षर अभियान




बलिया। नगर के भृगु आश्रम स्थित महर्षि भृगु मंदिर के मुख्य द्वार एवं शहीद पार्क चौक के मुख्य द्वार पर ददरी मेला लगाने के समर्थन में युवाओं और छात्रनेताओं ने शनिवार को हस्ताक्षर अभियान चलाया। इस अभियान में जनपदवासियों ने अपना-अपना हस्ताक्षर कर इस मुहिम को समर्थन कर मेला लगाए जाने की मांग की। हस्ताक्षर अभियान की शुरूआत करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय ने कहा कि ददरी मेला भृगु काल की परंपरा का जीवंत चिह्न है। जिसे रोककर जिला प्रशासन ने गलत किया है। 


सभासद विकास पांडेय लाला ने कहा कि अगर शीघ्र ही जिला प्रशासन अपना निर्णय नहीं बदलता है तो जनता और उग्र हो जाएगी। छात्रनेता अचिंत्य त्रिपाठी ने कहा कि जिले की आस्था पर जिला प्रशासन जनपदवासियों पर अपना निर्णय थोप रही है। रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मेले को रोकना जिला प्रशासन के तानाशाही रवैया है। युवा व्यवसायी सौरभ पाठक ने कहा कि यह मेला सदियों से व्यापार का केंद्र रहा है जिससे कई छोटे-बड़े व्यापारी की रोजी-रोटी चलती थी। इस मौके पर पूर्व चेयरमैन संजय उपाध्याय, डॉ. सूूबेदार सिंह, संतोष सिंह, जैनेंद्र पांडेय, उषा सिंह, रूपेश चौबे, मनन मिश्र, विंध्याचल मिश्र, फूलबदन तिवारी, आशीष तिवारी आदि रहे।

 


समाजवादी पार्टी के  नेता व नगर पालिका बलिया के पूर्व चेयरमैन लक्ष्मण गुप्ता ने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि ददरी मेला एक मेला ही नहीं है बल्कि नगरपालिका के आय का साधन भी है। ददरी मेला ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। यह मेला नाच, गाने का नहीं है। यह मेला जनपद के मान-सम्मान और जनभावनाओं का मेला है। 


इस मेले से बच्चों, बुजुर्गो, महिलाओं के साथ ही किसान और पशुपालकों का अटूट संबंध है। ददरी मेला कोरोना के नाम पर एक छोटी प्रशासनिक बैठक कराकर स्थगित करना कहीं से ठीक नहीं है। सरकार द्वारा ददरी मेला लगाने के लिए कोई ठोस पहल न करना ये साबित करता है कि बलिया के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, विरासत बलिया की पहचान और जनता की जनभावनाओं से कोई लेना देना नहीं है।





रिपोर्ट धीरज सिंह

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