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किसान आन्दोलन से बेफिक्र किसान कर रहे अपना काम


रतसर (बलिया) एक तरफ कृषि कानूनों के खिलाफ हल्ला मचा हुआ है। किसान आन्दोलन चल रहा है और दिल्ली गेट पर लगातार धरना दिया जा रहा है।सरकार और किसान के बीच छठवें दौर की वार्ता हुई लेकिन सार्थक परिणाम नही निकला। वहीं गन्ना,गेहूं के अलावा सब्जी उत्पादन करने वाले आम किसान कृषि कानून से बेफिक्र है। ऐसे किसानों का कहना है कि हमारी सब्जी और अनाज तो मण्डी में बिक रहा है। कानून की जानकारी का हमें नही पता। यही वजह है कि मंगलवार को जब भारत बन्द हुआ तो उसमें आम किसानों की सहभागिता अपेक्षित नही रही, वह खेती कार्य में व्यस्त रहा। कोई गेहूं फसल की सिचाई तो कोई यूरिया से टाप ड्रेसिंग की तैयारी में जुटा रहा। जनऊपुर गांव के प्रगतिशील किसान शिवप्रसाद पाण्डेय से किसान आन्दोलन के बारे में बताया कि किसानों के नाम पर राजनीति बन्द होनी चाहिए। वही नूरपुर के सब्जी उत्पादक किसान शिवानन्द वर्मा ने बताया कि खेती छोड़कर आन्दोलन आदि के बारे में सोचने की कोई जरूरत नही समझते है। साल भर मेहनत करते है तो परिवार का भरण पोषण होता है। जगदेवपुर के किसान सुरेश पाण्डेय ने बताया कि समय समय पर सरकार किसान सम्मान निधि दे देती है जिसके कारण समय से खाद एवं बीज लेकर हम अपनी खेती करते है। हम खेती किसानी करने वाले लोग है हमें फुर्सत कहां है कही जाने की। वहीं यूरिया लेने बाजार जा रहे किसान करीमन राम ने बताया कि किसानों के नाम पर राजनीति बन्द होनी चाहिए। हमें खेती की चिन्ता है। बहकावे में आकर हम अपना समय व्यर्थ नही करना चाहते। किसान नन्दलाल यादव अपने खेतों में दवा छिड़काव करते हुए मिले। उन्होने बताया कि किसान को आगे करके केवल राजनीति हो रही है। इससे आम जनमानस पर कोई प्रभाव नही पड़ने वाला है।


रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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