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मंगल पांडेय की जयंती 30 जनवरी पर विशेष : अपने राष्ट्र और धर्म के लिए मंगल पांडे ने दी कुर्बानी


दुबहर(बलिया) : स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी 1831  को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन गाजीपुर जनपद के बलिया तहसील के नगवा गांव में एक सामान्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था।  वे ईस्ट इंडिया कंपनी के 34 नंबर देसी पैदल सेना की 19वीं रेजीमेंट की पांचवी कंपनी के 1446 नंबर के सिपाही थे।  उनकी प्रथम नियुक्ति बंगाल प्रांत के बैरकपुर छावनी में हुई थी। एक दिन मंगल पांडेय को पता चला कि हम सिपाही जो कारतूस दांत से खींचकर चलाते हैं, उसमें गाय और सुअर की चर्बी लगी होती है।  यह सुन मंगल पांडेय भड़क उठे और अपने साथियों के साथ 29 मार्च 1857 को परेड ग्राउंड में ही विद्रोह का बिगुल बजा दिया।  जिसमें अंग्रेजी पुलिस के सार्जेंट मेजर हियुशनऔर लेफ्टिनेंट बाब मारा गया।  मंगल पांडेय पकड़े गए और उन पर मुकदमा चला 8 अप्रैल 1857 को प्रातः 5:30 बजे परेड ग्राउंड में ही उनको फांसी के फंदे पर झूला दिया गया। 

साम्राज्यवादी व्यवस्था के खिलाफ मंगल पांडे की शहादत चिर स्मरणीय बनी रहेगी।


       

युवाओं में पैदा करना होगा देशभक्ति का जज्बा:- बब्बन विद्यार्थी

दुबहर(बलिया) शहीद मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवा निवासी सामाजिक चिंतक बब्बन विद्यार्थी ने बातचीत के दौरान कहा कि राष्ट्र भक्ति धारा बहाकर सोए भारत को जगाने वाले मंगल पांडे ने अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध जो आवाज उठाई, उसकी गूंज किसी न किसी रूप में अभी भी हमारे समाज में सुनाई पड़ती है। 

बलिया की अस्मिता और बलिया के गौरवशाली इतिहास को कायम रखने के लिए युवाओं में अपने राष्ट्र के प्रति देशभक्ति का जज्बा पैदा करना होगा।  आज भले ही मंगल पांडे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी राष्ट्रभक्ति साहस तथा बलिदान हमेशा नई पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करता रहेगा।


रिपोर्ट:-नितेश पाठक

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